Party Constitution: चुनाव आयोग द्वारा सभी राजनीतिक दलों से उनकी संविधान की कॉपी मांगी है। चुनाव आयोग का कहना है कि सभी राजनीतिक दल 30 दिनों के अंदर अपने नवीनतम संविधान की कापी ताज़ा संशोधनों के साथ साझा करें।
दरअसल, अब तक कई दलों द्वारा पार्टी संविधान में हुए बदलावो के पश्चात भी निर्वाचन आयोग के साथ अब तक कोई जानकारी नहीं सौंपी है जिस वजह से यह मांग रखी गई। आयोग का कहना है कि संविधान एक अहम दस्तावेज है और इसमें उन जरूरी चरणों के बारे में जानकारी होती है जिनके जरिए पार्टी अपने लक्ष्यों अथवा लोकतांत्रिक तरीके से कार्य करती है।

Party Constitution: क्या है आयोग का निर्देश?
आयोग ने पार्टी के अध्यक्षों को पत्र लिखा, “निर्वाचन आयोग ने पार्टी से अनुरोध किया है कि वह अपने नए संविधान की कॉपी, जिसमें ताज़ा संशोधन भी शामिल हों, 30 दिनों के भीतर आयोग को भेज दे।
ताकि आयोग इस अपडेटेड संविधान को अपनी वेबसाइट पर डाल सके।
यह एक रिमाइंडर है।
निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों के संविधान अपनी वेबसाइट पर इसलिए अपलोड करता है, ताकि हर कोई उन्हें आसानी से देख और समझ सके।”
देरी होने पर क्या होगी कार्रवाई?
Party Constitution: भारतीय निर्वाचन आयोग के मुताबिक, सभी राजनीतिक दल के लिए यह जानकारी देना अनिवार्य है। अगर किसी भी पार्टी द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना संविधान जमा नहीं किया गया, तो चुनाव आयोग नियमों के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर सकता है।
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