Iran crisis: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच OPEC+ देशों ने एक अहम फैसला लेते हुए तेल उत्पादन बढ़ाने का ऐलान किया है। सऊदी अरब, रूस समेत सात बड़े तेल उत्पादक देशों ने जून महीने के लिए अपने उत्पादन कोटा में प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इस कदम को वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
UAE की दूरी पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि हाल ही में OPEC+ से अलग हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का बयान में कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि संगठन के अंदर कुछ मतभेद जरूर हैं, जिन्हें फिलहाल सार्वजनिक तौर पर नजरअंदाज किया जा रहा है।
Iran crisis: दुनिया पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाने की यह घोषणा ज्यादा प्रतीकात्मक हो सकती है, क्योंकि वास्तविक उत्पादन पहले ही तय सीमा से कम चल रहा है। ऐसे में बाजार पर इसका सीधा असर सीमित रह सकता है, लेकिन इससे निवेशकों और वैश्विक बाजार को एक भरोसे का संदेश जरूर जाएगा।
Iran crisis: क्यों लिया गया ये फैसला?
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण कई खाड़ी देशों का निर्यात बाधित है। ऐसे में OPEC+ यह दिखाना चाहता है कि वह अब भी बाजार को संभालने में सक्षम है।
रूस को मिला फायदा
इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा रूस को मिल रहा है, जो OPEC+ का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध और लगातार हो रहे हमलों के कारण रूस के लिए अपने तय उत्पादन स्तर को बनाए रखना भी चुनौती बना हुआ है।
आगे क्या हो सकता है?
Iran crisis: OPEC+ के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। इराक और कजाकिस्तान जैसे देश पहले भी तय सीमा से ज्यादा उत्पादन करते रहे हैं, ऐसे में उनके संगठन से अलग होने की आशंका भी बनी हुई है। अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
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