India High Alert: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में हाईअलर्ट जारी कर दिया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखें और अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करें। इसका उद्देश्य देश में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर प्रदर्शन तेज
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई राज्यों में उनके समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक और भड़काऊ संदेश फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकारों और पुलिस प्रशासन ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, उकसाने वाला या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड न करें। अफवाहें और गलत जानकारी माहौल खराब कर सकती हैं और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
India High Alert: हिंसा पर सख्त कार्रवाई होगी
पुलिस-प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है और उसका सम्मान किया जाएगा। लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे कृत्यों से जान-माल का नुकसान होता है और समाज को परेशानी झेलनी पड़ती है।

प्रशासन ने यह भी कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शांति बनाए रखने की अपील
इसी संदर्भ में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में भी स्थानीय पुलिस ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोगों से सहयोग की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए नागरिक ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो।
पुलिस द्वारा जारी अपील में साफ कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। यह न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति के कारण स्कूल-कॉलेज बंद हो सकते हैं, आवाजाही बाधित हो सकती है और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।






