Up Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अनिश्चितता के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से कड़े सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं और क्या आयोग तय समय तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएगा। इस मामले ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हाईकोर्ट ने आयोग से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने की। याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की तैयारियों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अगली सुनवाई 25 मार्च को दोपहर 2 बजे होगी।
Up Panchayat Election: संवैधानिक समयसीमा पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायत का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष ही हो सकता है, इसलिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। वहीं आयोग ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है, जो आयोग के परामर्श से होती है।
मई में खत्म होगा कार्यकाल
प्रदेश में 2021 में हुए पंचायत चुनाव के आधार पर ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने संकेत दिया है कि चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले कराए जाने चाहिए।
Up Panchayat Election: देरी की दो बड़ी वजहें
चुनाव में देरी के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम 27 मार्च तक चलेगा। दूसरा, प्रशासनिक अमला जनगणना के हाउस लिस्टिंग कार्य में व्यस्त रहेगा, जो सितंबर तक चल सकता है। इसके चलते चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां
सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक दल भी फिलहाल चुनाव टालने के पक्ष में हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत चुनाव में जोखिम है। वहीं पंचायतीराज विभाग की ओर से आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है, जिसमें करीब दो महीने का समय लगता है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भी अभी तैयारी अधूरी है।







