Bengal Election 2026: बंगाल में चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। नौकरशाही से लेकर पुलिस महकमे तक व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं और किसी को भी इससे अछूता नहीं रखा गया है। इस बार आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर को भी पद से हटा दिया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का संकेत मिलता है।
26% अधिकारियों का बदला जाना क्यों अहम?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार को राज्य के 73 रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) को हटाने का फैसला लिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और हर सीट पर एक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त होता है। ऐसे में 73 अधिकारियों का हटाया जाना कुल संख्या का करीब 26 प्रतिशत है, जो एक बड़ा और असामान्य प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
Bengal Election 2026: राज्य सरकार और आयोग के बीच बढ़ा टकराव
इस फैसले के बाद राज्य सरकार और आयोग के बीच टकराव और तेज हो गया है। सत्ताधारी दल पहले से ही कई वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर नाराजगी जता चुका है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने दलील दी कि इस तरह के तबादले जमीनी जरूरतों के आधार पर किए जाते हैं और उनका उद्देश्य स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना होता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की है।
Bengal Election 2026: सभी नजरें कोर्ट के फैसले पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े फैसले चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। अब सभी की नजरें कोर्ट के अगले फैसले और आयोग के आगे के कदमों पर टिकी हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले यह निर्णय प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले चुनाव परिणामों पर भी पड़ सकता है।
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