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फेसबुक विज्ञापन से करोड़ों की ठगी! दिल्ली पुलिस ने 11 साइबर ठग दबोचे, 22 लाख लूट का खुलासा

दिल्ली की साइबर पुलिस ने निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए। गिरोह सोशल माध्यमों के जरिए झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करता था।
हाई रिटर्न के झांसे में लाखों की ठगी

Cyber Investment Fraud: दिल्ली के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े निवेश ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह दिल्ली, राजस्थान और मुंबई से मिलकर काम कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में कुल 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को निवेश पर ज्यादा मुनाफे का लालच देकर पैसे ठगते थे।

फेसबुक विज्ञापन से 22 लाख ठगी

इस गिरोह ने एक 60 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति को भी अपना शिकार बनाया और उनसे करीब 22.67 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया है। इनमें 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक और चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, 4 पैन कार्ड, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, 2 पीओएस मशीन, 6 यूपीआई स्कैनर, एक प्रिंटर और कई नकली दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल खासतौर पर फर्जी बैंक खाते खोलने के लिए किया जाता था।

यह मामला 21 नवंबर 2025 को सामने आया, जब पीड़ित व्यक्ति ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें फेसबुक पर एक विज्ञापन दिखा था, जिसमें निवेश करने का ऑफर दिया गया था। इस विज्ञापन में वित्त मंत्री के भाषण का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था और एआई आधारित ट्रेडिंग के जरिए भारी मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। जैसे ही उन्होंने दिए गए लिंक पर जाकर रजिस्ट्रेशन किया, ठगों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया।

Cyber Investment Fraud: हाई रिटर्न के झांसे में लाखों की ठगी
हाई रिटर्न के झांसे में लाखों की ठगी

Cyber Investment Fraud: निवेश सलाहकार बनकर किया साइबर फ्रॉड

आरोपियों ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर फोन और व्हाट्सऐप के जरिए उनसे बात की। उन्होंने पीड़ित को मुद्रावन ऐप और 9 प्रो नाम के प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर कराया। इसके बाद उनसे क्रेओविया टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर निवेश करवाया गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाया गया ताकि भरोसा बन सके, लेकिन जैसे ही बड़ी रकम ट्रांसफर हुई, आरोपी अचानक संपर्क से बाहर हो गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई। इस टीम में एसआई लव देशवाल, हेड कांस्टेबल सचिन, राजेश और राकेश शामिल थे। जांच इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक और एसीपी संघमित्रा की निगरानी में की गई। पुलिस ने जांच के दौरान मनी ट्रेल की जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया विश्लेषण और तकनीकी निगरानी जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया। इन जांचों से पता चला कि यह गिरोह दिल्ली के रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस इलाके से काम कर रहा था।

फर्जी खातों का पूरा ऑफिस पकड़ा

जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इन दोनों इलाकों में छापेमारी की। इस दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें तजिंदर सिंह उर्फ लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18) और गिरिराज किशोर (18) शामिल हैं। यहां एक पूरा ऑफिस बनाया गया था, जहां से फर्जी बैंक खाते खोले और चलाए जाते थे। मौके से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड और नकली कंपनी स्टैंप भी बरामद किए गए।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नेताजी सुभाष प्लेस में उनका फ्रंट ऑफिस चलता था, जबकि रोहिणी के दीप विहार में बैकएंड का काम होता था। ये लोग फर्जी या म्यूल बैंक अकाउंट बनाकर दूसरे साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था।

Cyber Investment Fraud: मुंबई कनेक्शन से बड़ा खुलासा

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने प्रतिभा उर्फ पायल और सतीश नाम के दो और लोगों की पहचान की, जिन्हें म्यूल अकाउंट चलाने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद जांच में मुंबई का कनेक्शन भी सामने आया। मनी ट्रेल की आगे जांच से पता चला कि ठगी की रकम को कई स्तरों से घुमाकर मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में खोले गए एक्सिस बैंक के खाते में जमा किया जाता था। पुलिस को यह भी पता चला कि मुंबई में एक और गिरोह सक्रिय था, जो म्यूल बैंक अकाउंट खरीदने का काम करता था। तकनीकी जांच से उन लोगों की पहचान हुई, जो पहले राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में रहते थे और बाद में नेटवर्क चलाने के लिए मुंबई चले गए थे।

इसके बाद पुलिस ने राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में भी छापा मारा। यहां से चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ लकी (20), दीपक मेवाड़ा उर्फ देव (35) और त्रिलोक चंद नायक (32) के रूप में हुई। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे किराए के बैंक खाते यानी म्यूल अकाउंट का इंतजाम करते थे और उन्हें मुंबई में काम कर रहे एक व्यक्ति ‘पीके’ को उपलब्ध कराते थे। बैंक खातों की जानकारी व्हाट्सऐप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की जाती थी। ठगी की रकम लेने से पहले इन खातों की जांच भी की जाती थी।

कंबोडिया से ऑपरेट हो रहा नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़ा हुआ है। दिल्ली और मुंबई में मौजूद आरोपी असल में कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों के लिए काम कर रहे थे। वहीं से भारतीय लोगों को निशाना बनाया जाता था और उन्हें निवेश के नाम पर फंसाया जाता था। इसके लिए सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं और अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है।

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