WB Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा 23 मार्च की आधी रात के आसपास जारी की गई सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कितने नए नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए—इस पर अब तक कोई स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसी अनिश्चितता ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
अधूरी जानकारी से बढ़ा शक और सियासी तनाव
इससे पहले 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में करीब 60 लाख नाम अंडर एडजुडिकेशन के तहत रखे गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 705 न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार अब तक लगभग 29 लाख नामों पर फैसला लिया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों की प्रक्रिया अभी जारी है। लेकिन सप्लीमेंट्री सूची में इन फैसलों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक न होने से विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
WB Election 2026: टीएमसी ने उठाए गंभीर सवाल, न्यायालय जाने की चेतावनी
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है। खासतौर पर भवानीपुर जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। टीएमसी का कहना है कि यह सीधे तौर पर लोगों के मतदान अधिकार पर हमला है और अगर स्थिति साफ नहीं हुई तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेंगे।
WB Election 2026: भाजपा का पलटवार न्यायिक निगरानी में हुई प्रक्रिया
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में हुई है। पार्टी का दावा है कि यह कदम फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए जरूरी था और इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि जो भी बदलाव किए गए हैं, वे नियमों के तहत और वैध तरीके से किए गए हैं।
आम मतदाताओं की परेशानी भी आई सामने
इस विवाद के बीच आम मतदाता भी परेशान नजर आ रहे हैं। लोगों को अपनी स्थिति जांचने के लिए बूथ-स्तर की सूची देखने को कहा गया है, लेकिन कई जगह तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आई हैं। जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका दिया गया है, लेकिन प्रक्रिया को लेकर भ्रम बना हुआ है।
चुनावी माहौल और भी गरमाने के संकेत
इस पूरे विवाद ने चुनावी माहौल को और तीखा बना दिया है। एक तरफ भाजपा इसे फर्जी वोटरों की सफाई बता रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दे रही है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग पर टिकी है कि वह इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या अंतिम आंकड़े सामने आते हैं।राज्य में 294 सीटों के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में वोटर लिस्ट को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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