Supreme Court: पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर (समान मतदाता पहचान) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई टल गई है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी। इस दौरान, सीजेआई (मुख्य न्यायाधीश) ने टिप्पणी की कि बाकी राज्यों में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसमें अड़चनें आईं हैं।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में देरी
सीजेआई ने एक न्यूज आर्टिकल का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया आसानी से पूरी हो गई, जबकि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की सरकारें हैं। इससे पहले, 10 मार्च को ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया था, और कहा था कि इस प्रक्रिया से लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, विशेष रूप से वे लोग जो समाज के हाशिए पर हैं।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सुनवाई में पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए हस्तक्षेप किया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मतदाताओं द्वारा दायर आपत्तियों और दावों का निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को शामिल किया जाए। इसके तहत कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को कुछ सेवानिवृत्त और सेवारत न्यायिक अधिकारियों को मनोनीत करने का निर्देश दिया गया।
पड़ोसी राज्यों से न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल में प्रतिनियुक्त किया जाएगा, ताकि एसआईआर प्रक्रिया के तहत दायर दावों और आपत्तियों का निपटारा तेज़ी से किया जा सके। इस कदम से मतदाता सूची के पुनरीक्षण में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है।







