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ट्विशा से अनु तक, कब रुकेगी टॉक्सिक रिश्तों में महिलाओं की मौत?

Mp news: भोपाल की ट्विशा शर्मा बार-बार अपने घरवालों से कहती थी कि वह परेशान है, उसके साथ कुछ ठीक नहीं हो रहा। फिर एक दिन उसकी मौत हो गई। अब सवाल यही है कि उसने खुदकुशी की या उसे इस कदर मजबूर कर दिया गया कि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा? जांच के बाद सच सामने आएगा, लेकिन इतना जरूर साफ है कि ट्विशा एक ऐसे रिश्ते में जी रही थी जहां वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। जयपुर की अनु मीणा का मामला भी दिल दहला देने वाला है। उसने वीडियो कॉल पर अपने पति से बात करते हुए फांसी लगा ली। परिवार का आरोप है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था, मारपीट होती थी और गालियां दी जाती थीं। परिजनों ने यह भी दावा किया कि मार्च में उसके पति ने उसे और बच्चों को घर में बंद कर गैस खोल दी थी। इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन अगर यह सच है तो सवाल सिर्फ एक है, इतना सब होने के बाद भी अनु उसी रिश्ते में रहने को क्यों मजबूर थी?

दहेज और लालच ने छीनी कई बेटियों की जिंदगी

ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर ने भी अपनी जिंदगी खत्म कर ली। परिवार का आरोप है कि शादी में करोड़ों खर्च करने के बावजूद ससुराल वालों की मांगें खत्म नहीं हुईं। स्कॉर्पियो के बाद फॉर्च्यूनर और लाखों रुपये मांगे जा रहे थे। पति और ससुर की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अदालत ही तय करेगी कि आरोप कितने सही हैं। मगर यह साफ दिखता है कि दीपिका एक ऐसे माहौल में रह रही थी जहां सम्मान और सुकून की जगह लालच ने ले ली थी। बेंगलुरु की 26 साल की लक्ष्मी प्रिया की कहानी भी कुछ अलग नहीं है। परिवार का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी। शायद उसने भी अपने करीबियों को अपने दर्द के बारे में बताया होगा। लेकिन सवाल वही है, जब एक रिश्ता डर और दर्द देने लगे तो समाज और परिवार बेटियों को वहां से निकालने की बजाय समझौता करने की सलाह क्यों देता है?

Mp news: शहर हो या गांव, महिलाएं कहीं पूरी तरह सुरक्षित नहीं

महिलाओं के खिलाफ हिंसा सिर्फ किसी एक शहर या वर्ग की समस्या नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि गांवों में करीब 34% महिलाएं पति या साथी की हिंसा झेलती हैं, जबकि शहरों में भी यह आंकड़ा 27% है। यानी आधुनिक सोच और तरक्की के दावों के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक घरेलू हिंसा सिर्फ गरीब परिवारों तक सीमित नहीं है। अमीर और पढ़े-लिखे परिवारों से भी दहेज हत्या और प्रताड़ना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। रिश्तों में प्यार और सम्मान की जगह कई बार लालच, दबाव और हिंसा ले लेते हैं।

हर 90 मिनट में जा रही एक महिला की जान

Mp news: NCRB के आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में देशभर में 5737 दहेज हत्याएं दर्ज की गईं। यानी हर 90 मिनट में एक महिला अपनी जान गंवा रही है। सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए, जहां 2038 केस दर्ज हुए। बिहार 1078 मामलों के साथ दूसरे और मध्य प्रदेश 450 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ट्विशा, अनु, दीपिका और लक्ष्मी… ये सिर्फ चार नाम नहीं हैं। ये उन हजारों महिलाओं की कहानी हैं जो आज भी किसी टॉक्सिक रिश्ते में घुट-घुटकर जी रही हैं। शायद इस वक्त भी कोई बेटी अपने घरवालों को बता रही होगी कि उसके साथ गलत हो रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि कितने परिवार अपनी बेटी से यह कह पाते हैं, “तुम्हारी जिंदगी और सुरक्षा किसी भी रिश्ते से ज्यादा जरूरी है।”

 

 

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