Temple Diplomacy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान प्रम्बानन मंदिर का दर्शन चर्चा का केंद्र बना। बुधवार सुबह जकार्ता में दुनिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में से एक प्रम्बानन पहुंचकर पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती दी। पिछले एक दशक में भारत ने सिर्फ अपने देश में ही नहीं, बल्कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में प्राचीन हिंदू और बौद्ध धरोहरों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है।
बांग्लादेश और नेपाल में विरासत का पुनर्निर्माण
बांग्लादेश में 1971 में ध्वस्त हुआ रामना काली मंदिर भारत के सहयोग से 2021 में फिर से बनकर तैयार हुआ। इसे भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना गया। इसके साथ ही जॉय काली माता मंदिर, आनंदमयी काली मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के संरक्षण में भी भारत ने मदद की।2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद भारत ने 5 करोड़ डॉलर के पैकेज से 28 विरासत स्थलों के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। इनमें सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बूढ़ानीलकंठ मंदिर धर्मशाला जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।

Temple Diplomacy: वियतनाम से कंबोडिया तक संरक्षण का विस्तार
भारत की सांस्कृतिक कूटनीति दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली है। वियतनाम के माय सोन सैंक्चुअरी में शैव परंपरा से जुड़े इस यूनेस्को स्थल के संरक्षण में भारत ने सहयोग किया। 2016 में भूकंप से क्षतिग्रस्त म्यांमार के बागान क्षेत्र में ASI ने 12 पैगोडा और आनंदा मंदिर का पुनर्स्थापन पूरा किया।कंबोडिया के अंगकोर वाट और ता प्रोहम मंदिर परिसर की मरम्मत में भी भारत का योगदान रहा। 2024 से लाओस के हजार साल पुराने वाट फू शिव मंदिर के संरक्षण का काम भी भारत ने शुरू किया है।
खाड़ी और श्रीलंका में भी भारत की पहल
2019 में प्रधानमंत्री मोदी ने बहरीन की यात्रा के दौरान 200 साल पुराने श्रीनाथजी मंदिर के पुनर्विकास का उद्घाटन किया। यह खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है। श्रीलंका में भगवान शिव के पांच प्राचीन मंदिरों में शामिल तिरुकेतीश्वरम मंदिर के पुनर्स्थापन के लिए भारत ने अनुदान सहायता दी।विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर डिप्लोमेसी का उद्देश्य सिर्फ मंदिरों की मरम्मत नहीं है। इसके जरिए भारत उन देशों के साथ अपने हजारों साल पुराने सभ्यतागत संबंधों को फिर से जोड़ रहा है, जहां कभी भारतीय संस्कृति और हिंदू-बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा। प्रम्बानन से लेकर अंगकोर तक, भारत अब अपनी विरासत को विदेश नीति का सबसे मजबूत पुल बना रहा है।
Written by- Mansi Sharma







