Uddhav Thackeray: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रांची में छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी छात्रों के साथ अन्याय हुआ है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। उद्धव ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद भी रांची जाएंगे और छात्रों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होंगे।उद्धव ठाकरे ने देशभर में चल रही युवाओं की नाराजगी का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा हो रही है कि Gen-Z युवाओं ने किस तरह सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल कम दबाव की हवाएं चल रही हैं, लेकिन यह तूफान आने से पहले की शांति हो सकती है।उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के युवा लगातार जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार के शीर्ष नेतृत्व के पास उनसे मिलने और उनकी बात सुनने का समय नहीं है।उन्होंने कहा कि किसी एक मंत्री का इस्तीफा ले लेने से पूरा मामला खत्म नहीं हो जाता। युवाओं के सवालों का जवाब देना जरूरी है और सरकार को उनके साथ सीधे संवाद करना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री युवाओं से मिलने का समय नहीं निकालते, लेकिन अचानक रात में कुछ लोगों को ‘फ्रेंड्स’ कहकर मिलने का समय जरूर मिल जाता है।
‘अब खुद इंस्टाग्राम से सरकार चलाने लगे हैं’
उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार चलाने के आरोपों को लेकर भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब उन पर आरोप लगाया जाता था कि वह फेसबुक के जरिए सरकार चलाते हैं। लेकिन अब वही लोग खुद इंस्टाग्राम के जरिए सरकार चलाने लगे हैं।उन्होंने शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा के साथ गए नेताओं पर भी हमला बोला। उद्धव ने उन्हें ‘गद्दार’ बताते हुए कहा कि जिन्होंने शिवसेना छोड़कर ‘शाह सेना’ बना ली, वे प्रधानमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन युवाओं से मिलने के लिए समय नहीं है।उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि जब इन नेताओं से मुलाकात के लिए समय निकाला जा सकता है, तो देश के युवाओं और छात्रों से बातचीत क्यों नहीं की जा सकती।
Uddhav Thackeray: रांची के छात्रों के समर्थन में बोले उद्धव ठाकरे
रांची में छात्रों के आंदोलन को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि झारखंड के बच्चों के साथ भी अन्याय हुआ है। सरकार को उनकी मांगों और समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे और छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो वह खुद रांची जाकर उनके साथ खड़े हो सकते हैं।उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्रों के आंदोलन और सरकार की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। उद्धव ठाकरे ने युवाओं की आवाज को नजरअंदाज किए जाने के खिलाफ सरकार को चेतावनी भी दी।उद्धव ठाकरे ने शिवसेना से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से इस मामले की सुनवाई लंबित है और उनकी अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि फैसला संविधान और कानून के मुताबिक होना चाहिए।उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उनकी पार्टी अदालत के सामने यह मुद्दा रखेगी कि जब शिवसेना से जुड़ा मामला लंबित है, उस दौरान प्रधानमंत्री से संबंधित राजनीतिक मुलाकातों का क्या प्रभाव पड़ सकता है।
Uddhav Thackeray: शरद पवार गुट के सांसदों की पीएम से मुलाकात पर क्या बोले?
शरद पवार के सांसदों के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की चर्चा पर भी उद्धव ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान को बचाना चाहते हैं और संविधान के साथ खड़े हैं, वे उनके साथ रहेंगे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह दूसरी पार्टियों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं से संवाद करने की कोशिश की, लेकिन युवा उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।उद्धव के मुताबिक, युवा अब सवाल पूछ रहे हैं कि उन्हें प्रवचन देने के बजाय सरकार से जवाब क्यों नहीं मांगा जा रहा। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांग है कि अमित शाह के इस्तीफे को लेकर भी जवाब दिया जाए।उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं के भीतर बढ़ रहा असंतोष केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। सरकार को समय रहते युवाओं की आवाज सुननी होगी, क्योंकि अगर उनकी समस्याओं और सवालों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो यह नाराजगी और बड़ा रूप ले सकती है।
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