JPSC JSSC Protest: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। 14वीं JPSC परीक्षा, JSSC-CGL समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए छात्र निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी आंदोलनरत छात्रों के समर्थन का ऐलान किया है। शनिवार को CJP का प्रतिनिधिमंडल रांची पहुंचा और प्रदर्शन स्थल पर छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया।
CJP प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से की मुलाकात
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पार्टी झारखंड के छात्रों के साथ पूरी तरह खड़ी है और उन्हें हरसंभव समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक मुकेश ने कहा कि CJP के प्रतिनिधि छात्रों के साथ अपना आंदोलनकारी अनुभव साझा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी मंच से औपचारिक समर्थन देगी या नहीं, यह जरूरी नहीं है, लेकिन संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, समर्थन जारी रहेगा।
JPSC JSSC Protest: पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
छात्रों का आरोप है कि राज्य की भर्ती परीक्षाओं में बार-बार अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी को लेकर प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC परीक्षा और JSSC-CGL समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और OMR शीट तथा उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिक करना शामिल है। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना युवाओं के भविष्य के साथ न्याय नहीं हो सकता।
देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल जारी
छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा वहीं, झारखंड सरकार का कहना है कि परीक्षा संबंधी आरोपों और शिकायतों की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी छात्रों की समस्याओं पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह चुके हैं। CJP के समर्थन के बाद आंदोलन को एक नया राजनीतिक समर्थन मिला है। अब छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर है और यह देखना अहम होगा कि सरकार उनकी मांगों पर कितना ठोस निर्णय लेती है।
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