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फूड सेफ्टी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पैकेट के सामने लेबलिंग पर केंद्र से फैसला लेने को कहा

 Supreme Court Food Safety:

Supreme Court Food Safety: फूड सेफ्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को प्री-पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FOPL) को लेकर फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों को स्वस्थ भोजन चुनने में मदद मिल सकती है।

Supreme Court Food Safety: FOPL को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश-

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिका पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ‘3S एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दायर की गई है। इसमें पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर FOPL को अनिवार्य करने की मांग की गई है।

Supreme Court Food Safety: सरकार के रुख पर कोर्ट ने उठाए सवाल-

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के उस तर्क पर सवाल उठाया, जिसमें विकसित देशों में इस्तेमाल होने वाले लेबलिंग सिस्टम को भारत में लागू करने में कठिनाई की बात कही गई थी। कोर्ट ने चिली, इजराइल और कनाडा जैसे देशों के उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि पब्लिक हेल्थ की सुरक्षा के लिए भारत को भी बेहतर मानक तय करने चाहिए।

बच्चों के लिए क्यों जरूरी है फ्रंट लेबलिंग-

कोर्ट ने कहा कि FOPL लोगों को खाद्य पदार्थों में मौजूद अनहेल्दी सामग्री के बारे में आसानी से जागरूक कर सकता है। खासतौर पर बच्चों के तेजी से जंक फूड की ओर आकर्षित होने को लेकर चिंता जताई गई। बेंच ने मोटापे और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे का भी जिक्र किया।

FSSAI की देरी पर कोर्ट नाराज-

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी लेबलिंग को लेकर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की देरी पर भी सवाल उठाए। कोर्ट का मानना है कि पैकेज के सामने स्पष्ट जानकारी मिलने से ग्राहक किसी उत्पाद को खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकेंगे।

केंद्र को मिला 2 हफ्ते का समय-

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेषज्ञों से सलाह लेकर यह तय करने को कहा है कि FOPL के जरिए पोषण संबंधी जानकारी किस तरीके से दिखाई जाए। इसमें कलर कोड, शब्द, नंबर, लेटर, सिंबल या प्रतिशत आधारित जानकारी जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।केंद्र को अपना फैसला कोर्ट के सामने रखने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया गया तो वह आगे जरूरी निर्देश जारी कर सकता है।

‘राइट टू हेल्थ’ से जोड़ा फूड लेबलिंग का मुद्दा-

बेंच ने फूड लेबलिंग के मुद्दे को संविधान के तहत स्वास्थ्य के अधिकार से भी जोड़ा। कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा अनुच्छेद 47 के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार की राज्य की जिम्मेदारी का उल्लेख किया। याचिका में गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि FOPL लोगों को अधिक मात्रा में मौजूद चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट के बारे में चेतावनी देने में मदद कर सकता है।

10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई-

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 10 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा। फिलहाल केंद्र सरकार को FOPL को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है

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