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वंदे मातरम् विवाद: BJP का आरोप- सोनिया ने रोकने की कोशिश की, कांग्रेस ने दिया ये जवाब

Vande Mataram Row:

Vande Mataram Row: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत के गायन को रोकने का संकेत देने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं।

Vande Mataram Row: BJP ने वीडियो शेयर कर लगाया आरोप-

भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया। पार्टी का दावा है कि वंदे मातरम् का गायन चल रहा था और शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी असहज नजर आईं। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने गीत को रोकने का संकेत दिया। पार्टी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान परेशान दिखाई दिए।

Vande Mataram Row: कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत-

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वंदे मातरम् को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे। सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी लाने का इशारा कर रही थीं। जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया था।

1937 से कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम्-

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् गाने की परंपरा पुरानी है। उन्होंने 28 अक्टूबर 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का जिक्र किया, जिसमें महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और जवाहरलाल नेहरू समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। रमेश के मुताबिक, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियां गाने का फैसला हुआ था।

वंदे मातरम् के अपमान पर सजा का प्रावधान-

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब वंदे मातरम् को लेकर नए कानूनी प्रावधान चर्चा में हैं। संसद से पारित नए कानून के तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात कही गई है। प्रावधानों के मुताबिक, जानबूझकर वंदे मातरम् का अपमान करने या उसके गायन में रुकावट डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

केंद्र ने जारी किए थे नए निर्देश-

गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को वंदे मातरम् और जन गण मन के गायन-बजाने को लेकर निर्देश जारी किए थे। निर्देशों के अनुसार, अगर किसी कार्यक्रम में दोनों का गायन या वादन होता है तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन गण मन होगा। जिस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत है, वहां क्रम राज्य गीत, वंदे मातरम् और फिर जन गण मन रहेगा।

1875 में लिखा गया था वंदे मातरम्-

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को की थी। बाद में 1882 में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित किया गया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् देश की आजादी की लड़ाई का प्रमुख नारा बन गया था।

वंदे मातरम् पर संसद में भी हो चुकी है बहस-

Vande Mataram {वंदे मातरम्} के 150 साल पूरे होने के मौके पर संसद के शीतकालीन सत्र में विशेष चर्चा भी हुई थी। उस दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच इसे लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को हटाने का आरोप लगाया था, जबकि कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए इसे मुद्दा बनाने का आरोप लगाया था

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