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सुखबीर बादल अस्पताल से डिस्चार्ज, हरसिमरत ने NIA जांच की मांग उठाई

Sukhbir Badal

Sukhbir Badal: शिरोमणि अकाली दल प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्हें महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित गुरुद्वारे में हुए हमले के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस बीच उनकी पत्नी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दोनों हमलों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने हमले में इस्तेमाल कथित किरपान और घायल हाथ की तस्वीरें भी साझा की हैं।

नांदेड़ गुरुद्वारे में हुआ था हमला

सुखबीर सिंह बादल पर 13 अगस्त को नांदेड़ के एक गुरुद्वारे में निहंग वेशधारी व्यक्ति ने हमला किया था। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद अब उन्हें छुट्टी दे दी गई है। इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के बाहर भी सुखबीर बादल पर हमले की कोशिश हुई थी।

Sukhbir Badal: हरसिमरत ने बताया बड़ी साजिश का संदेह

हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए पंजाब पुलिस और आम आदमी पार्टी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 2024 के हमले का आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहा है और पुलिस की कथित ढिलाई के कारण ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और धार्मिक आधार पर हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश चिंताजनक है। धार्मिक स्थलों पर बार-बार होने वाली हिंसक घटनाएं सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करती हैं।

दोनों हमलों की NIA जांच की मांग

हरसिमरत ने मांग की है कि 13 अगस्त 2026 और 4 दिसंबर 2024 की घटनाओं की एनआईए से व्यापक जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या दोनों हमलों के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र या आपस में जुड़ा नेटवर्क था।

Sukhbir Badal: राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया मामला

हरसिमरत ने पंजाब को सीमावर्ती और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य बताते हुए कहा कि यदि किसी उग्रवादी, अंतरराज्यीय या विदेशी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसकी गहन जांच जरूरी है। उन्होंने गृह मंत्री से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही कहा कि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान या झूठे मामले में नहीं फंसाया जाना चाहिए।

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