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BRICS में मोदी का बड़ा संदेश: ‘किसी के खिलाफ नहीं भारत’! ईरान-सऊदी-UAE के मतभेद के बीच कैसे बनी सहमति? जानिए क्या कहा…

BRICS Summit 2026: भारत की राजधानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को भारत की कूटनीतिक सोच का स्पष्ट संदेश दिया। शनिवार को भारत मंडपम में BRICS नेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करता है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब BRICS के भीतर शामिल देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग राय है। पश्चिम एशिया का संकट इसका बड़ा उदाहरण है। ईरान, सऊदी अरब और UAE BRICS का हिस्सा हैं, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में उनके हित और प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं। इसके बावजूद BRICS के संयुक्त बयान पर सहमति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस पर बातचीत सुबह करीब 4 बजे तक चली। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने मतभेदों के बीच सहमति कैसे बनी और भारत की भूमिका इसमें कितनी अहम रही?

सवाल-1: PM मोदी ने BRICS को ‘किसी के खिलाफ नहीं’ क्यों कहा?

BRICS के विस्तार के साथ यह बहस तेज हुई है कि क्या यह समूह पश्चिमी देशों के प्रभाव को चुनौती देने वाला मंच बन रहा है। भारत इस तरह की तस्वीर से दूरी बनाता रहा है। मोदी का बयान इसी सोच को स्पष्ट करता है कि BRICS का उद्देश्य किसी दूसरे देश या समूह के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। यानी भारत BRICS को टकराव के मंच के बजाय सहयोग और संवाद के मंच के रूप में देखना चाहता है। यह रुख भारत की उस विदेश नीति से भी जुड़ा है जिसमें वह अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध बनाए रखता है।

BRICS Summit 2026: सवाल-2: ईरान-सऊदी-UAE के बीच मतभेद क्यों बड़ी चुनौती थे?

BRICS के विस्तार के बाद संगठन के भीतर देशों के हितों की विविधता काफी बढ़ गई है। ईरान, सऊदी अरब और UAE इसका महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। तीनों पश्चिम एशिया के प्रभावशाली देश हैं, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, संघर्ष और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में किसी संवेदनशील मुद्दे पर साझा भाषा तैयार करना आसान नहीं होता। BRICS जैसे संगठन में संयुक्त बयान के लिए सदस्य देशों को कम से कम उन प्रमुख बिंदुओं पर सहमत होना पड़ता है, जिन्हें सामूहिक रूप से स्वीकार किया जा सके।

सवाल-3: संयुक्त बयान पर सहमति को इतनी अहम क्यों माना जा रहा है?

BRICS अब पहले के मुकाबले ज्यादा विविध समूह है। सदस्य देशों की संख्या बढ़ने के साथ उनके आर्थिक और रणनीतिक हित भी अलग-अलग हैं। इसके बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति बनना यह दिखाता है कि संगठन के भीतर संवाद के जरिए साझा जमीन तलाशने की कोशिश जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, बयान को लेकर बातचीत देर रात से लेकर सुबह तक चली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की पृष्ठभूमि में यह बातचीत और मुश्किल हो गई थी। भारत की अध्यक्षता के लिए चुनौती यही थी कि मतभेदों को BRICS की पूरी प्रक्रिया पर हावी होने से रोका जाए।

BRICS Summit 2026: सवाल-4: इसमें भारत की कूटनीति की क्या भूमिका रही?

भारत ने बातचीत और आम सहमति पर जोर दिया। इसका उद्देश्य यह रहा कि अलग-अलग देशों के मतभेद BRICS के साझा एजेंडे को पूरी तरह प्रभावित न करें। यही भारत की अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण संदेश भी है- संगठन में हर देश के हित और संवेदनशीलताओं को जगह देते हुए साझा मुद्दों पर आगे बढ़ना। हालांकि, यह कहना उचित नहीं होगा कि BRICS के सभी मतभेद खत्म हो गए हैं। संयुक्त बयान पर सहमति का अर्थ सिर्फ इतना है कि सदस्य देशों ने एक साझा दस्तावेज के लिए जरूरी सहमति बनाने में सफलता पाई।

सवाल-5: मोदी ने BRICS के अगले 20 साल के लिए क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन के काम की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मोदी ने एक स्थायी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया, जिससे अध्यक्षता बदलने के बावजूद पुराने फैसलों पर काम जारी रहे और उनके क्रियान्वयन की निगरानी हो सके। उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड बनाने की बात भी रखी, जिसमें फैसलों की जिम्मेदारी, समयसीमा और प्रगति दर्ज की जा सके। यानी भारत का जोर केवल फैसला लेने पर नहीं, बल्कि फैसले को लागू कराने की व्यवस्था पर भी है।

BRICS Summit 2026: सवाल-6: ग्लोबल साउथ पर मोदी ने क्या संदेश दिया?

मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नियम बनाने की प्रक्रिया में बराबर की भूमिका निभाने वाला बनना चाहिए। खास तौर पर नई तकनीकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि AI और दूसरी उभरती तकनीकें आने वाले समय को बदलेंगी। ऐसे में इनके इस्तेमाल और नियमन से जुड़े नियम तय करने में ग्लोबल साउथ की भागीदारी भी जरूरी है। यह भारत के उस प्रयास से जुड़ता है जिसमें वह विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश करता रहा है।

BRICS Summit 2026
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सवाल-7: BRICS में चीन और रूस की मौजूदगी भारत के लिए क्या मायने रखती है?

BRICS के मंच पर भारत को एक साथ रूस और चीन जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ काम करना पड़ता है। शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता भारत मंडपम में मौजूद रहे। भारत-चीन के रिश्तों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद तनाव रहा है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच भारत को चीन के साथ संवाद का एक अतिरिक्त रास्ता भी देता है, जबकि रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी अलग महत्व रखती है।

BRICS Summit 2026: सवाल-8: क्या BRICS पश्चिम के खिलाफ खड़ा हो रहा है?

भारत के मौजूदा रुख को देखें तो इसे सीधे ‘पश्चिम विरोधी’ मंच कहना सही नहीं होगा। BRICS देशों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा जरूर होती है। डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार हो रहा है। लेकिन अभी BRICS की अपनी कोई साझा मुद्रा नहीं है। इसलिए इसे डॉलर को तत्काल खत्म करने वाली व्यवस्था के तौर पर देखना अतिशयोक्ति होगी। भारत का जोर ज्यादा व्यापक है—विकल्प बढ़ाना, भुगतान आसान करना और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग मजबूत करना।

सवाल-9: भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि क्या होगी?

भारत की BRICS अध्यक्षता की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि सम्मेलन कितने बड़े स्तर पर आयोजित हुआ। असल परीक्षा यह होगी कि क्या सदस्य देश- साझा फैसलों को लागू कर पाते हैं, आपसी व्यापार और निवेश बढ़ा पाते हैं, डिजिटल और वित्तीय सहयोग को आगे ले जाते हैं, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत कर पाते हैं और गंभीर भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रख पाते हैं। मोदी का अगले 20 वर्षों का एजेंडा इसी दिशा में एक संस्थागत सोच को सामने रखता है।

BRICS Summit 2026
                                                       BRICS Summit 2026
सवाल-10: तो भारत का BRICS संदेश आखिर क्या है?

भारत का संदेश तीन शब्दों में समझा जा सकता है- सहमति, सहयोग और संतुलन। एक तरफ भारत रूस और चीन के साथ BRICS में बैठ रहा है, दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के साथ भी उसके रणनीतिक संबंध बने हुए हैं। वहीं ईरान, सऊदी अरब, UAE और दूसरे देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत साझा मंच को चलाने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि मोदी का यह कहना कि “BRICS किसी के खिलाफ नहीं है” केवल एक भाषण की लाइन नहीं, बल्कि भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का संकेत भी माना जा सकता है।

BRICS Summit 2026: मतभेद रहेंगे, लेकिन मंच नहीं टूटना चाहिए

BRICS जितना बड़ा और विविध हुआ है, उसके भीतर मतभेदों की संभावना भी उतनी ही बढ़ी है। ईरान, सऊदी अरब और UAE के अलग-अलग क्षेत्रीय हित इसका उदाहरण हैं।ऐसे में संयुक्त बयान पर सहमति बनना अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सभी मतभेद खत्म हो गए। भारत के सामने असली चुनौती यही है कि मतभेदों के बावजूद संवाद चलता रहे और BRICS घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने वाला मंच बने।

प्रधानमंत्री मोदी का “किसी के खिलाफ नहीं, सबको साथ लेकर चलने” वाला संदेश इसी संतुलन की तस्वीर पेश करता है। अब देखना होगा कि दिल्ली में बनी यह सहमति आने वाले वर्षों में BRICS के फैसलों और वैश्विक राजनीति में कितनी प्रभावी साबित होती है।

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