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UP में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर 60-70 बनाम 105 का पेंच क्या? अखिलेश-राहुल के गठबंधन में क्यों फंसा सीट बंटवारा?

UP ELECTION:

UP ELECTION: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। सबसे बड़ा सवाल सीटों के बंटवारे को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक सपा कांग्रेस के लिए करीब 60-70 सीटों का शुरुआती खाका तैयार कर रही है, जबकि कांग्रेस की तरफ से इससे काफी ज्यादा सीटों की मांग सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस की मांग 105 सीटों तक बताई गई थी, जबकि हालिया रिपोर्ट में यह मांग 115-120 सीटों तक पहुंचने की बात कही गई है।

सपा 60-70 सीटों के फॉर्मूले पर क्यों सोच रही?

सपा का सीट बंटवारे का तरीका केवल कुल सीटों की संख्या पर आधारित नहीं बताया जा रहा है। पार्टी हर जिले और विधानसभा सीट के स्तर पर आंकलन कर रही है। इसमें जातीय समीकरण, पिछले चुनावों में दोनों दलों का प्रदर्शन, संभावित उम्मीदवार की स्थिति और सीट जीतने की संभावना जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है। यानी अखिलेश यादव की पार्टी सीटों की संख्या से ज्यादा ‘जीतने योग्य सीटों’ पर जोर देती दिखाई दे रही है।

UP ELECTION: कांग्रेस 105 से आगे क्यों मांग रही सीटें?

कांग्रेस का तर्क अपने पुराने चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक मौजूदगी से जुड़ा है। पार्टी उन क्षेत्रों में ज्यादा सीटें चाहती है जहां उसका पारंपरिक आधार या राजनीतिक प्रभाव रहा है। सितंबर की एक रिपोर्ट में कांग्रेस की ओर से 115-120 सीटों की मांग बताई गई थी। इसमें अमेठी और रायबरेली जैसे कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों को लेकर विशेष फॉर्मूले की मांग भी शामिल है।

2017 और 2024 के आंकड़े क्यों अहम हैं?

सीट बंटवारे की बातचीत में पिछला प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधारों में से एक बन सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 37 जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। दोनों दलों ने उस चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। इससे सपा अपने मौजूदा प्रदर्शन को सीटों के बंटवारे में आधार बनाना चाहेगी, जबकि कांग्रेस अपनी जीती हुई सीटों और प्रभाव वाले क्षेत्रों पर दावा मजबूत कर सकती है।

UP ELECTION: असली पेंच सीटों का नहीं, चुनावी गणित का है

SP-कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ यह तय करना नहीं है कि किसे कितनी सीटें मिलेंगी। दोनों दलों को यह भी देखना होगा कि उम्मीदवार, जातीय समीकरण और स्थानीय संगठन एक-दूसरे के वोट बैंक को नुकसान न पहुंचाएं। 2027 का चुनाव करीब आने के साथ बीजेपी भी अपनी सरकार के कामकाज और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में विपक्ष के लिए सीटों का तालमेल जितना जल्दी और स्पष्ट होगा, उतना ही वह संयुक्त चुनावी रणनीति पर ध्यान दे सकेगा। फिलहाल 60-70 और 105/115-120 की मांग के बीच का अंतर यही बताता है कि SP-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग पर अंतिम सहमति अभी बाकी है। आने वाले समय में दोनों दलों की बातचीत यह तय करेगी कि 2027 में गठबंधन किस फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरता है।

 

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