UP News: उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार के सवाल पर नाराज हो गए। मामला 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गए एक सवाल से जुड़ा है, जिसमें पत्रकार ने ‘अब्दुल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। सांसद ने इस शब्द पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी पूरे समुदाय को इस तरह संबोधित करना उसका मजाक उड़ाने या लोगों को बरगलाने जैसा है।
कुर्बानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार ने सवाल किया कि चुनाव आते ही राजनीतिक दल ‘अब्दुल’ को याद करने लगते हैं, लेकिन अब ‘अब्दुल’ कहां है? सवाल पूरा होने से पहले ही सांसद ने पत्रकार को रोक दिया और ‘अब्दुल’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि किसी समुदाय को एक विशेष नाम से संबोधित करके उसका मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकार से अपने शब्द वापस लेने को कहा। सांसद ने कहा कि देश के मुसलमान सम्मानित नागरिक हैं और उन्हें किसी एक शब्द या पहचान के जरिए सीमित करना उचित नहीं है। मुसलमानों ने देश के लिए लंबे समय से योगदान दिया है और उनकी कुर्बानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सांसद ने यह भी कहा कि कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी, अलग–अलग राजनीतिक दलों में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद हैं।
UP News: मेरे सामने अब्दुल नाम मत लीजिए
बातचीत के दौरान सांसद ने ‘अब्दुल’ शब्द को लेकर अपनी नाराजगी और स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके सामने इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति से जुड़ा सवाल है तो उसका नाम लेकर सवाल किया जाए। नदवी ने यह भी कहा कि देश के मुसलमानों को ‘अब्दुल’ जैसे किसी सामूहिक संबोधन के जरिए पेश करना सही नहीं है। उन्होंने पत्रकार से सवाल पूछते समय इस तरह की भाषा से बचने की अपील की। बातचीत के दौरान पत्रकार ने सांसद को याद दिलाया कि ‘अब्दुल’ शब्द का इस्तेमाल पहले उनकी ही पार्टी के स्थानीय नेता शानू फसाहत की ओर से किया गया था। इस पर भी सांसद ने नाराजगी जताई और पूछा कि शानू फसाहत कौन हैं। उन्होंने पत्रकार से कहा कि सवाल पत्रकारिता के स्तर के अनुरूप होना चाहिए।
नदवी ने कहा कि पत्रकारिता का भी एक स्तर होता है और सवाल उसी स्तर पर पूछे जाने चाहिए। सांसद ने आगे कहा कि उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करने के लिए बुलाया गया है। ऐसे में सवाल भी राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े होने चाहिए। उन्होंने बातचीत को राष्ट्रीय मुद्दों तक सीमित रखने पर जोर दिया।
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