India-Switzerland Deal: भारत और स्विट्जरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौते हुए हैं। स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तकनीक और माइग्रेशन-मोबिलिटी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी। इन समझौतों से भारतीय छात्रों, युवाओं, प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
India-Switzerland Deal: भारतीयों को 5 साल तक का मल्टीपल-एंट्री वीजा-
माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट के तहत योग्य भारतीय नागरिकों को अधिकतम 5 साल तक वैध मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा मिल सकती है। हर यात्रा के दौरान छह महीने तक रुकने का प्रावधान होगा। छात्रों के लिए एक साल का नवीकरणीय छात्र परमिट भी उपलब्ध होगा।
India-Switzerland Deal: हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स को मौका-
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच यंग प्रोफेशनल एग्रीमेंट भी हुआ है। इसके तहत हर साल दोनों देशों के 300 युवा प्रोफेशनल्स को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार और पेशेवर अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। जरूरत के अनुसार यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है। इससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने, नए कौशल सीखने और पेशेवर अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा।
रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर-
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच हुए समझौतों से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं। AIT इंडिया कार्यक्रम के जरिए ग्लोबल प्लेटफॉर्म और फंडिंग के अवसर मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान पर भी जोर दिया जाएगा।
100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य-
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इससे निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इन सेक्टरों में बढ़ सकता है कारोबार-
भारत की ओर से कृषि, दवा, वस्त्र और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, बैंकिंग, बीमा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में स्विस निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बढ़ेगा सहयोग-
दोनों देशों के बीच टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी और सुरंग निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। वाराणसी का रोपवे और नोएडा का जेवर एयरपोर्ट दोनों देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग के उदाहरण के तौर पर सामने आए हैं।
रक्षा और परमाणु ऊर्जा में भी साझेदारी-
भारत और स्विट्जरलैंड ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया गया है।
AI और वैश्विक शांति पर भी सहयोग-
दोनों देशों ने वैश्विक शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावना है। अगले साल जिनेवा में होने वाले AI शिखर सम्मेलन के जरिए जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित AI को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।भारत-स्विट्जरलैंड की यह साझेदारी व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर छात्रों, युवाओं, प्रोफेशनल्स, शोधकर्ताओं और कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकती है। हालांकि, इन समझौतों का वास्तविक असर इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
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