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यूपी की राजनीति का गढ़ बना प्रतापगढ़, 5 सांसदों के बाद अब छठे की बारी

Pratapgarh politics:

Pratapgarh politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतापगढ़ जिले का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले से जुड़े पांच सांसद इस समय संसद में मौजूद हैं। अब बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए राधा कांत ओझा को उम्मीदवार बनाया है। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो प्रतापगढ़ से जुड़े सांसदों की संख्या छह हो जाएगी।

Pratapgarh politics: प्रतापगढ़ से जुड़े हैं ये 5 सांसद-

प्रतापगढ़ जिले से फिलहाल दो लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसद जुड़े हैं। लोकसभा में समाजवादी पार्टी के शिवपाल सिंह पटेल प्रतापगढ़ सीट से सांसद हैं। वहीं, जिले से जुड़ी कौशांबी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पुष्पेंद्र सरोज सांसद हैं। वह देश के सबसे युवा सांसद हैं। राज्यसभा में प्रतापगढ़ से जुड़े तीन सांसद हैं। इनमें बीजेपी के अमरपाल मौर्य और कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी और प्रमोद तिवारी शामिल हैं। इमरान प्रतापगढ़ी मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजा है।

Pratapgarh politics: राधा कांत ओझा की हो सकती है एंट्री-

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें प्रतापगढ़ निवासी राधा कांत ओझा का नाम भी शामिल है। राधा कांत ओझा, बीजेपी के पूर्व विधायक और यूपी के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके शिवाकांत ओझा के छोटे भाई हैं। अगर वह राज्यसभा चुनाव जीतते हैं तो प्रतापगढ़ से जुड़े सांसदों की संख्या छह हो जाएगी।

प्रमोद तिवारी का भी रहा है लंबा राजनीतिक सफर-

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से नौ बार विधायक रह चुके हैं। 2014 में उनकी बेटी आराधना मिश्रा ने रामपुर खास सीट पर उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। आराधना मिश्रा अब तक रामपुर खास सीट से तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं।

राजघरानों की राजनीति के लिए भी जाना जाता है प्रतापगढ़-

प्रतापगढ़ की राजनीति में ऐतिहासिक राजघरानों की भी बड़ी भूमिका रही है। आजादी के बाद लोकसभा चुनावों में कई बार राजघरानों से जुड़े नेताओं का दबदबा देखने को मिला। पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह प्रतापगढ़ से चार बार सांसद चुने गए थे। वह इंदिरा गांधी सरकार में प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल रहे। उनकी बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह भी कांग्रेस के टिकट पर तीन बार प्रतापगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। राजा अजीत प्रताप सिंह और उनके बेटे अभय प्रताप सिंह भी प्रतापगढ़ से सांसद रह चुके हैं।

राजा भैया का भी मजबूत प्रभाव-

प्रतापगढ़ के पश्चिमी हिस्से, खासकर कुंडा और बाबागंज की राजनीति में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का लंबे समय से प्रभाव है। राजा भैया 1993 से लगातार कुंडा विधानसभा सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं।

प्रतापगढ़ में हैं 7 विधानसभा सीटें-

प्रतापगढ़ जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें कुंडा, बाबागंज, रामपुर खास, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज शामिल हैं। इस तरह प्रतापगढ़ न केवल अपने राजनीतिक इतिहास बल्कि मौजूदा समय में संसद में जिले से जुड़े नेताओं की मौजूदगी के कारण भी यूपी की राजनीति में खास पहचान बना रहा है।

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