CJP PROTEST NEWS: CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर संसद में जनहित से जुड़े सवालों से बचने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मॉनसून सत्र के दौरान CJP और पेपर लीक से जुड़े छह सवालों को लोकसभा नियम 41(2) के तहत खारिज कर दिया गया।
CJP और पेपर लीक से जुड़े थे सवाल
सौरव दास के मुताबिक, लोकसभा सांसद माथेस्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से CJP के प्रदर्शनों, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े कई मुद्दों पर जवाब मांगा था। उन्होंने दावा किया कि इन सवालों को नियम 41(2) की अलग-अलग उप-धाराओं का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया गया।
किन 6 मुद्दों पर मांगा गया था जवाब?
सौरव दास के अनुसार, सांसद ने इन छह मुद्दों पर सवाल उठाए थे— 1. NEET-UG 2026 के आवेदन शुल्क की वापसी। 2. सरकार के प्रति जनता के बढ़ते अविश्वास से जुड़ा सवाल। 3. दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों के लिए पीने के पानी और साफ-सफाई की सुविधा। 4. प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का संवाद। 5. छात्र कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दे। 6. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ व्यवहार।
CJP PROTEST NEWS: सौरव दास ने पूछा- संसद में जवाब नहीं तो कहां?
CJP नेता ने सवाल उठाया कि अगर ऐसे जनहित के मुद्दों पर संसद में सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार की जवाबदेही कहां तय होगी? उन्होंने पूछा कि क्या लोगों को अपने सवालों के जवाब पाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा? उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान संसद में जवाब नहीं देने को लेकर सवाल उठाया।
‘प्रश्नकाल संसदीय लोकतंत्र की आत्मा’
सौरव दास ने कहा कि किसी सांसद का सरकार से सवाल पूछना कोई बाधा नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना है। उनके मुताबिक, प्रश्नकाल का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकार और मंत्री जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद को केवल अपनी नीतियों पर मुहर लगाने वाली संस्था नहीं बना सकती और युवाओं की समस्याओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
CJP PROTEST NEWS: पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर भी हमला
इससे पहले सौरव दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ के उल्लेख पर भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार से सवाल करने वाले पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली बताना उचित नहीं है। सौरव दास ने दावा किया कि युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इसे बदलाव की आहट बताते हुए सरकार को युवाओं के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की नसीहत दी।
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