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Constitution Day: भारत का संविधान दुनिया का सबसे व्यापक- योगी आदित्यनाथ

Constitution Day: संविधान दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत का संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि वह सूत्र है जो भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विविधता को एकता के सूत्र में पिरोता है। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल प्रति सौंपते समय बाबा साहेब आंबेडकर ने भी यही कहा था कि यह दस्तावेज भारत को नेतृत्व देने वाली मार्गदर्शिका है।

2 वर्ष 11 महीने 18 दिनों की ऐतिहासिक यात्रा

मुख्यमंत्री योगी ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया की याद दिलाते हुए कहा कि 1946 में संविधान सभा के गठन के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में अनेक समितियाँ बनीं। बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा नेतृत्व की गई ड्राफ्टिंग कमेटी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और विशेषज्ञों के योगदान के कारण भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र बन पाया है।

Constitution Day: कर्तव्यों के बिना अधिकारों अस्तित्व नहीं: योगी

सीएम योगी ने कहा कि संविधान दिवस पर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को याद दिलाया था कि स्वतंत्रता की कीमत समझना जरूरी है। हमने स्वतंत्रता संग्राम की यातनाएं नहीं देखीं, इसलिए अधिकारों पर अधिक जोर देते हैं और कर्तव्यों को भूल जाते हैं।

योगी ने कहा, “जहां कर्तव्य नहीं, वहां अधिकार भी सुरक्षित नहीं। तानाशाही वहीं जन्म लेती है, जहां लोग कर्तव्यों से मुंह मोड़ कर केवल अधिकार मांगते हैं।”

Constitution Day: सामाजिक एकता ही भारत का मार्ग

कार्यक्रम में उद्देशिका का सामूहिक वाचन कराया गया और स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व की भावना को दोहराया गया। योगी ने कहा कि भारत की विरासत राम, कृष्ण, बुद्ध, अशोक, और अनगिनत बलिदानियों ने देश की एकता और अखंडता को गढ़ा है। उन्होंने कहा कि पंचप्रण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता, सैनिकों के सम्मान और कर्तव्यों के पालन ही विकसित भारत का रास्ता हैं।

समाज को मिला संवैधानिक सशक्तिकरण

सीएम ने कहा कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में महिलाओं को मताधिकार बहुत बाद में मिला, जबकि भारत ने शुरुआत से ही समान अधिकार दिए। दलित और जनजाति समुदायों को भी संविधान ने आरक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संविधान का अपमान करना उन गरीबों और बलिदानियों का अपमान है, जिन्होंने इस लोकतंत्र को मजबूत किया।

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