us-iran peace talks: अमेरिका और ईरान मौजूदा युद्धविराम को एक दीर्घकालिक समझौते में तब्दील करने के लिए आगे आए हैं। दोनों पक्ष एक “समझौता ज्ञापन” (एमओयू) की बात कर रहे हैं जो सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा। आगामी 30 से 60 दिनों के भीतर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक अंतिम समझौता हो सकता है।इस दृष्टिकोण का मूल आधार यह है कि एक बार समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, लड़ाई रुक जाएगी, जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी खबर होगी।
समझौते की संभावनाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को इस साल के अंत में मध्यावधि चुनाव का सामना करना है और ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में है।ऐसे में शांति की संभावना प्रबल मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही भविष्य में युद्ध की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।अमेरिका अभी भी ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बनने वाले संभावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) की कुछ शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है।जाहिर है कि युद्ध के काले बादल अभी भी छा सकते हैं। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मैक्रो रुबियो के अनुसार, समझौता अभी भी प्रक्रियाधीन है। रुबियो ने सोमवार को भारत दौरे के दौरान कहा, “या तो हम एक अच्छा समझौता करेंगे या हमें इससे निपटने का कोई और तरीका अपनाना होगा।” लेकिन उस समझौता ज्ञापन में क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
us-iran peace talks: समझौते की अड़चनें
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अपने रिपोर्टर के हवाले से बताया कि रविवार को दोनों पक्षों के बीच कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन अमेरिका अब भी समझौते की कुछ अहम शर्तों में रुकावट डाल रहा है। इनमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज करना भी शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अभी भी इस बात की संभावना है कि यह एमओयू रद्द हो सकता है। ईरान ने साफ कहा है कि वह अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े अपने ‘रेड लाइन’ मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा।
शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी से बात करते हुए कहा था कि ईरान और अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए एक एमओयू को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं।
बाघेई ने कहा, “इस समय हमारा मुख्य ध्यान इस थोपे गए युद्ध को खत्म करने पर है।” उन्होंने बताया कि दोनों देशों की कोशिश पहले 14 बिंदुओं वाले एक एमओयू पर सहमति बनाने की है।
उन्होंने कहा कि 30 से 60 दिनों के भीतर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक अंतिम समझौता हो सकता है। उनके मुताबिक, एमओयू में जिन बड़े मुद्दों पर बात हो रही है, उनमें अमेरिका की समुद्री कार्रवाई या नौसैनिक नाकेबंदी को रोकना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
us-iran peace talks: शांति वार्ताएं भी विफल हुई
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच आठ अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 40 दिनों तक लड़ाई चली थी, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी।
सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक दौर की शांति वार्ता की थी, लेकिन उसमें कोई समझौता नहीं हो पाया। जानकारों के मुताबिक परमाणु संवर्धन, होर्मुज पर नियंत्रण जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच अभी भी सहमति बनने में अड़चनें आ सकती हैं।
सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक दौर की शांति वार्ता की थी, लेकिन उसमें कोई समझौता नहीं हो पाया। जानकारों के मुताबिक परमाणु संवर्धन, होर्मुज पर नियंत्रण जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच अभी भी सहमति बनने में अड़चनें आ सकती हैं।








