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बाबा नीम करौली की असली पहचान क्या थी? घर छोड़ने से लेकर संत बनने तक की कहानी

नीम करौली बाबा कैसे बने महाराज जी?

Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच काफी पसंद की जा रही है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने अब तक 140 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। फिल्म की टीम इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रही है। फिल्म के चर्चित होने के साथ ही नीम करौली बाबा के धाम पहुंचने वाले भक्तों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। फिल्म देखने के बाद बाबा में आस्था रखने वाले लोग उनके दर्शन के लिए उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर उत्तर प्रदेश के नीम करौली आश्रम तक पहुंच रहे हैं।

कंबल ओढ़े बाबा नीम करौली की तस्वीर आपने कई जगह जरूर देखी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बाबा को पूरी दुनिया नीम करौली बाबा के नाम से जानती है, उनका असली नाम क्या था?

Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा का असली नाम क्या था?

अधिकतर लोग उन्हें बाबा नीम करौली या नीम करौली वाले बाबा के नाम से जानते हैं। हालांकि, बहुत कम लोगों को उनके वास्तविक नाम की जानकारी है। बाबा नीम करौली का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। यह नाम उन्हें उनके परिवार की ओर से दिया गया था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा कैसे बने महाराज जी?
नीम करौली बाबा कैसे बने महाराज जी?
कम उम्र में ही सांसारिक जीवन से होने लगे दूर

जब लक्ष्मी नारायण छोटे थे, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां के निधन के बाद उनका मन धीरे-धीरे सांसारिक मोह-माया से दूर होने लगा। वह ईश्वर की प्राप्ति की इच्छा रखने लगे। भगवान राम को पाने की चाहत में उनकी आस्था उनके परम भक्त हनुमान जी के प्रति और गहरी होती चली गई।हनुमान भक्ति में उनकी रुचि इतनी बढ़ गई कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही घर और गांव छोड़ दिया। इसके बाद वह जंगलों से होते हुए अलग-अलग राज्यों में घूमते रहे। इसी दौरान उन्हें ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ कि उन्होंने अपनी पहचान और पुराने नाम को पीछे छोड़ दिया।

Neem Karoli Baba: नीम करोरी से जुड़ा बाबा का नाम

गृहस्थ जीवन छोड़ने के बाद लक्ष्मी नारायण अलग-अलग स्थानों पर साधुओं के साथ रहने लगे। उनका अधिकांश समय पूजा-पाठ, भक्ति और तपस्या में बीतता था। इस दौरान लोग उन्हें सम्मान से ‘महाराज जी’ कहकर बुलाने लगे।बाद में घूमते हुए वह उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नीम करोरी गांव पहुंचे। बाबा लंबे समय तक इसी स्थान पर रहे। इसी वजह से लोग उन्हें नीम करोरी बाबा कहने लगे। समय के साथ उनका नाम ‘बाबा नीम करौली’ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। हालांकि, इस दौरान बहुत कम लोगों को यह जानकारी थी कि उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। उनके भक्तों के लिए वह केवल बाबा नीम करौली ही थे।

भक्तों के बीच चमत्कारी संत की पहचान

बाबा नीम करौली में आस्था रखने वाले भक्त उन्हें बेहद चमत्कारी संत मानते हैं। उनके अनुयायियों का विश्वास है कि बाबा लोगों की परेशानियों को बहुत जल्दी दूर कर देते थे। उन्हें हनुमान जी का अवतार भी माना जाता है।आज भी बाबा के भक्त उनके चमत्कारों को महसूस करने का दावा करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके आश्रमों और धामों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद बाबा को लेकर लोगों की दिलचस्पी और आस्था और भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

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