NEET Protest: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होगी।
NEET Protest: 2700 से अधिक आरोपियों पर दर्ज FIR वापस नहीं होगी-
सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गंभीर अपराधों में शामिल 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएगी। कानूनी प्रक्रिया के तहत इन मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।
NEET Protest: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई सख्ती-
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है तो उसे बेवजह संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी अपराधी को बचाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।
18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई-
यह मामला अब 18 अगस्त को फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। अदालत प्रदर्शनकारियों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर आगे विचार करेगी।
SIT गठन पर हो सकता है फैसला-
सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शनकारियों और पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर विचार कर सकता है। साथ ही यह भी जांच हो सकती है कि पुलिस पर हमला छात्रों ने किया था या भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिए थे अहम निर्देश-
28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से रोकते हुए कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोगों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने कई राज्यों को नोटिस जारी कर डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए थे।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प-
20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को भी चुनौती-
राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में इस तरह की निगरानी नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।
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