NEW DELHI: संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, डीएमके, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई दल बैठक से वॉकआउट कर गए।
महुआ मोइत्रा ने उठाए आमंत्रण पर सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि लोकसभा में पार्टी के 28 अधिकृत सांसद दर्ज हैं, फिर भी कथित बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं।
NEW DELHI: कांग्रेस बोली- संविधान की रक्षा के लिए किया वॉकआउट
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने संविधान की रक्षा और तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी तथा शिवसेना के समर्थन में बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले किसी गुट को मान्यता देना पूरी तरह असंवैधानिक है।
सपा ने सरकार के कदम को बताया अलोकतांत्रिक
समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि टीएमसी ने बैठक में आधिकारिक सांसदों के बजाय पहले कथित बागी सांसदों की सूची दिखाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे सरकार का अलोकतांत्रिक रवैया बताते हुए कहा कि विपक्ष ने इसी के विरोध में बैठक छोड़ी।
NEW DELHI: जेएमएम ने दल तोड़ने का लगाया आरोप
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों को अभी तक स्पीकर की मान्यता नहीं मिली, उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
परिसीमन पर भी जताई चिंता
महुआ माजी ने परिसीमन के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घट सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दे कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है।
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