P Chidambaram: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ संबंधी बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें उन लोगों में शामिल होने पर गर्व है, जिन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाता है। इसके बाद भाजपा नेताओं ने उन पर नक्सलवाद और उसके समर्थकों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है।
चिदंबरम के बयान पर भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि चिदंबरम का बयान उन लोगों को राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश है, जिन्हें भाजपा ‘दिमागी नक्सल’ या ‘अर्बन नक्सल’ कहती है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम का खुद को इस श्रेणी में रखना इस बात का संकेत है कि वह ऐसे लोगों के पक्ष में खड़े होना चाहते हैं। भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं का रुख नक्सलवाद को लेकर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद को लेकर देश में गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
P Chidambaram: प्रधानमंत्री के बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के एक दिन बाद तेज हुआ। प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से ‘दिमागी नक्सलवाद’ को देश के सामने बनी चुनौती बताया था। इसके बाद चिदंबरम की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसमें उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ कहलाने पर गर्व जताया। भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि नक्सलवाद से जुड़ी हिंसा और उसकी विचारधारा से होने वाले नुकसान पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल ‘नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीति कर रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस से मांगा जवाब
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह नक्सलवाद और उससे जुड़ी विचारधारा को लेकर क्या रुख रखती है। पार्टी ने चिदंबरम के बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से देश में नक्सलवाद को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। वहीं, चिदंबरम के बयान ने एक बार फिर ‘दिमागी नक्सलवाद’ की परिभाषा और इसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है।
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