Pitr Paksh: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से पितृ पक्ष को केवल पूर्वजों के स्मरण और तर्पण तक सीमित न रखते हुए उनके त्याग, परिश्रम और संस्कारों से मिली विरासत को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता अपने उत्तरदायित्व को समझने का संस्कार भी है। आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध विरासत सौंपना हमारा धर्म है और इसी भावना से परिवार, समाज तथा राष्ट्र को नई ऊर्जा मिलती है।
प्रदेश और राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के नाम अपने संदेश में कहा कि हमारी महान सनातन संस्कृति अतीत को स्मरण करने की परंपरा मात्र नहीं, बल्कि अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य को जोड़ने वाली नवीन दृष्टि है। पितृ पक्ष इसी सनातन भाव की अभिव्यक्ति का अवसर है। उन्होंने कहा कि आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (27 सितंबर) से प्रारंभ हुआ यह पवित्र पक्ष आश्विन कृष्ण अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) के साथ पूर्ण होगा। इन दिनों श्राद्ध के माध्यम से हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और तर्पण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। पिंडदान हमें याद दिलाता है कि आज हम जो कुछ हैं, उसमें हमारे पूर्वजों के तप, त्याग, परिश्रम और संस्कारों का भी योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता अपने उत्तरदायित्व को समझने का संस्कार भी है। हमसे पहले की पीढ़ियों ने हमें जो दिया, उसे संरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों को उससे अधिक समृद्ध विरासत सौंपना हमारा धर्म है। सतत विकास की यही भावना परिवार को पिरोती है, समाज को अपनी जड़ों से जोड़ती है तथा प्रदेश और राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान करती है।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
हमारी महान सनातन संस्कृति अतीत को स्मरण करने की परंपरा मात्र नहीं, अपितु अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि है। पितृ पक्ष इसी सनातन भाव की अभिव्यक्ति का अवसर है। इन दिनों श्राद्ध के माध्यम से हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, तर्पण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
पूर्वजों से मिली स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की विरासत को आगे बढ़ाना भी हमारा दायित्व है। हमारी सरकार प्रदेश के प्रत्येक परिवार के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
आइए, स्वच्छता को अपनी दिनचर्या बनाएं, अपने आस-पास झाड़ियां न उगने दें, जलभराव न होने दें, बुखार जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और ‘दस्तक’ को हर घर में स्वास्थ्य-जागरूकता का अभियान बनाएं। स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज से ही विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार होगा।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 5, 2026
Pitr Paksh: परिवार के बुजुर्गों का करें सम्मान
उन्होंने इतिहास में वर्णित आगरा किले के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने पुत्र औरंगजेब की कैद में रह रहे शाहजहां ने पानी के लिए व्यग्र होकर उसे पत्र लिखा था। शाहजहां ने पत्र में सनातन परंपरा का उल्लेख किया, जिसमें दिवंगत पूर्वजों को भी जल अर्पित किए जाने की बात कही जाती है। वहीं, कैद में जीवित पिता को भी जल के लिए व्याकुल कर दिया। यह प्रसंग बताता है कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा हमारी सनातन जीवन पद्धति में कितनी गहराई से रची-बसी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस विरासत को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने आचरण में उतारें। परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें, बच्चों को अपने संस्कारों से परिचित कराएं तथा ज्ञान, सेवा और सदाचार की उस परंपरा को आगे बढ़ाएं, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और भविष्य को दिशा देती है। पूर्वजों से मिली स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की विरासत को आगे बढ़ाना भी हमारा दायित्व है। प्रदेश सरकार प्रत्येक परिवार के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
Pitr Paksh: स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज
इसी कड़ी में 1 से 31 अक्टूबर, 2025 तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान तथा 12 से 31 अक्टूबर, 2025 तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और अन्य विभागीय कर्मी घर-घर पहुंचकर स्वच्छता, रोग-लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी अभिशाप मानी जाने वाली इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन यह सिद्ध करता है कि समग्र प्रयास और जनभागीदारी से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वच्छता को अपनी दिनचर्या बनाने, अपने आसपास झाड़ियां न उगने देने, जलभराव रोकने और बुखार जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘दस्तक’ को हर घर में स्वास्थ्य-जागरूकता का अभियान बनाएं। स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज से ही विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार होगा।
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