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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला तो परमाणु डील से पीछे हट सकते हैं ट्रंप, ईरान ने रख दीं बड़ी शर्तें

परमाणु समझौते से आगे बढ़े ट्रंप, होर्मुज़ पर जोर

Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए अब परमाणु समझौते के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा पूरी तरह खोलने को ज्यादा महत्व दे सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों को संकेत दिया है कि अगर ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो अमेरिका बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी संघर्ष समाप्त करने का रास्ता तलाश सकता है।हालांकि, ईरान ने होर्मुज़ को फिर से खोलने के बदले कई ऐसी मांगें रखी हैं, जिनके कारण दोनों देशों के बीच समझौता आसान नहीं दिखाई दे रहा है। तेहरान अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र से वापस बुलाने और कई अन्य रियायतों की मांग कर रहा है।

होर्मुज़ बन सकता है ट्रंप की ‘एग्जिट प्लान’

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के चलते इस इलाके में समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है और बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों में कई बार यह दावा कर चुके हैं कि होर्मुज़ पूरी तरह खुला हुआ है। लेकिन ईरान का रुख इससे अलग है। तेहरान ने अमेरिकी युद्धपोतों और अमेरिका के सहयोगी देशों के जहाजों की आवाजाही पर आपत्ति जताई है।ईरान ने यह भी कहा है कि व्यावसायिक जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

ईरान ने रखी कई बड़ी शर्तें

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने होर्मुज़ को दोबारा खोलने के लिए कई शर्तें सामने रखी हैं।इन शर्तों में अमेरिका द्वारा युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र से वापस बुलाना शामिल है। इसके अलावा, ईरान चाहता है कि उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में जब्त की गई उसकी संपत्तियां वापस जारी की जाएं।तेहरान ने युद्ध से हुए नुकसान के बदले क्षतिपूर्ति की मांग भी की है। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ धमकियां और आक्रामक बयान देना बंद करे। साथ ही, क्षेत्र में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग भी की गई है।

ट्रंप पर बढ़ रहा घरेलू राजनीतिक दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में भी ट्रंप पर इस सैन्य संघर्ष को जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में अब तीन महीने से भी कम समय बचा है। वहीं, संघर्ष शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।ऐसे माहौल में ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह संघर्ष को इस तरह समाप्त करें, जिसे अमेरिका में अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा सके।होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होना ट्रंप को ऐसा राजनीतिक आधार दे सकता है। इससे वह यह संदेश दे सकते हैं कि उनके प्रयासों से एक महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार और तेल मार्ग फिर से सामान्य हुआ।

परमाणु समझौता क्यों हो सकता है पीछे?

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव का सबसे बड़ा कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। ट्रंप प्रशासन लगातार यह कहता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।लेकिन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हाल की बैठकों में ट्रंप ने अधिकारियों से कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद तेहरान के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करना मुश्किल हो सकता है।

ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की किसी भी नई परमाणु गतिविधि पर नजर रख सकती हैं और उसका पता लगा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की धमकी भी ईरान को दोबारा परमाणु हथियार बनाने से रोक सकती है।इसी सोच के कारण ट्रंप प्रशासन तत्काल परमाणु समझौता करने के बजाय पहले होर्मुज़ में समुद्री यातायात बहाल कराने को प्राथमिकता दे सकता है।

ईरान की आर्थिक मांगें बन सकती हैं बड़ी रुकावट

संभावित समझौते में सबसे कठिन मुद्दों में ईरान की आर्थिक मांगें शामिल हो सकती हैं। तेहरान अमेरिका से अरबों डॉलर की युद्ध क्षतिपूर्ति मांग रहा है। इसके साथ ही वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों को भी जारी कराने की मांग कर रहा है।ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा ईरान को नहीं दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, किसी समझौते के हिस्से के रूप में ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियों को शर्तों के साथ जारी करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।इसके अलावा, ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति देना और उस पर लगे प्रतिबंधों में कुछ छूट देना भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

बिना परमाणु समझौते के भी खत्म हो सकता है संघर्ष?

अगर ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल करने के लिए तैयार हो जाता है, तो ट्रंप के सामने परमाणु समझौते के बिना भी सैन्य संघर्ष खत्म करने का रास्ता खुल सकता है।हालांकि, ईरान की मौजूदा मांगों से संकेत मिलता है कि तेहरान सिर्फ होर्मुज़ को खोलने के बदले अमेरिका से कई महत्वपूर्ण रियायतें हासिल करना चाहता है।ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा केवल ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं रहेगा। चर्चा का केंद्र होर्मुज़ जलडमरूमध्य, आर्थिक प्रतिबंध, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान को दिए जाने वाले संभावित आर्थिक मुआवजे पर भी आ सकता है।

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