West Bengal: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद कोलकाता के प्रसिद्ध बेलूर मठ पहुंचे। हुगली नदी के किनारे बसे इस पवित्र स्थल पर पहुंचते ही उन्होंने संतों के सामने नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया। मठ परिसर में उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और पूरे माहौल में आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई।
बेलूर मठ क्यों है खास?
स्वामी विवेकानंद द्वारा 1897-98 में स्थापित बेलूर मठ रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है। इसे बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां शांति और आध्यात्मिक प्रेरणा की तलाश में पहुंचते हैं।
West Bengal: यह सिर्फ दौरा नहीं, आध्यात्मिक यात्रा थी
मठ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा था। शुभेंदु अधिकारी ने संतों से मुलाकात की, पूजा-अर्चना की और कुछ समय मठ के शांत वातावरण में बिताया।13 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब शुभेंदु अधिकारी पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, तब भी उन्होंने विधानसभा की सीढ़ियों पर घुटनों के बल बैठकर दंडवत प्रणाम किया था। उनकी यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। राजनीतिक गलियारों में इसे भारतीय परंपरा और संस्कृति के सम्मान से जोड़कर देखा गया।
West Bengal: योगी आदित्यनाथ के चरण छूकर लिया था आशीर्वाद
शपथ ग्रहण के दिन भी शुभेंदु अधिकारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। चुनाव प्रचार के दौरान भी एक रैली में उन्होंने मंच पर पहुंचते ही योगी के चरण स्पर्श किए थे। समर्थक इसे उनकी विनम्रता बताते हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखता है।
बेलूर मठ और बीजेपी का सांस्कृतिक कनेक्शन
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी लगातार स्वामी विवेकानंद की विचारधारा और हिंदू सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बंगाल की राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावों के दौरान बेलूर मठ का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी का यह दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।संतों के सामने झुके मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की यह तस्वीर अब पूरे बंगाल में चर्चा का विषय बनी हुई है। कोई इसे आस्था बता रहा है, तो कोई इसे राजनीति का नया अध्याय। लेकिन इतना तय है कि बेलूर मठ से निकली ये तस्वीरें बंगाल की सियासत में लंबे समय तक चर्चा में रहने वाली हैं।
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