PDS wheat scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) गेहूं घोटाले में पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई चुनावी माहौल के बीच कोलकाता, बर्धमान और हावड़ा समेत कई इलाकों में की गई, जिससे सियासी हलचल भी तेज हो गई है।
करोड़ों की हेराफेरी का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि गरीबों के लिए सरकारी योजना के तहत भेजे जाने वाले गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। आरोप है कि इस गेहूं को अवैध रूप से सस्ते दामों पर खरीदकर सप्लायर्स, डीलर्स और बिचौलियों की मिलीभगत से खुले बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा गया। इतना ही नहीं, गेहूं की पहचान छिपाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के असली बोरे बदल दिए जाते थे।
PDS wheat scam: पुरानी एफआईआर के आधार पर कार्रवाई
यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से 23 अक्टूबर 2020 को बसीरहाट थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इसमें कोलकाता, बर्धमान और हाबड़ा के 9 ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है, जिसमें निरंजन चंद्र साहा और उसके सहयोगी निशाने पर हैं. आरोप है कि गरीबों के गेहूं को अवैध रूप से सस्ते में खरीदकर बाजार में बेचा या निर्यात किया गया, जिससे करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई. निरंजन चंद्र साहा और उससे जुड़े नेटवर्क को मुख्य आरोपी बताया गया है। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
जांच में बड़े खुलासे की उम्मीद
एजेंसी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल सबूत और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई है और आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। क्या इस कार्रवाई से पीडीएस घोटाले के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो पाएगा, या मामला सिर्फ छापेमारी तक ही सीमित रह जाएगा?








