Chandigarh: आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान काफी दुखी दिखाई देते हैं। इस बीच उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।सूत्रों के मुताबिक वे राष्ट्रपति के सामने पंजाब के राज्यसभा सदस्यों को रिकॉल करने संबंधी अपना पक्ष रखना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भगवंत मान राज्य सभा सांसदों की टूट से न सिर्फ खफा हैं, बल्कि बेचैन भी हो सकते हैं कि कहीं अब राज्य के विधायक टूट गए तो उनकी सरकार का क्या होगा? विधायकों के टूटने की आशंकाएं इसलिए भी मजबूत हैं कि नेतृत्व के प्रति जिस असंतोष की वजह से सांसद टूटे, क्या गारांटी है कि वही असंतोष विधायकों के भीतर नहीं होगा?
चिंता की असल वजह क्या है ?
आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से तो सांसद और विधायक ही नहीं, बल्कि वे अन्ना हजारे तक खुश नहीं हैं जिनके आंदोलन के फलस्वरूप इस पार्टी का जन्म् हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना ने कहा कि यदि कोई नेता अपनी पार्टी छोड़ता है, तो इसके पीछे जरूर कुछ आंतरिक समस्याएं या असंतोष हो सकता है। उनके अनुसार, “अगर पार्टी सही तरीके से काम कर रही होती तो शायद नेता उसे छोड़ने का फैसला नहीं करते।” इस बीच चर्चा यह है कि पंजाब के करीब 28 विधायक भी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। इन विधायकों की नाराजी सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। आम आदमी पार्टी नेतृत्व को यह नहीं भूलना चाहिए कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेता आम आदमी पार्टी संगठन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। पंजाब में कई विधायकों को इनकी कृपा से टिकट भी मिले। ये दोनों नेता इन विधायकों के साथ मिलकर कोई खिचड़ी पका सकते हैं। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब की सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अभी जो स्थितियां चल रही हैं, उन्हें देखते हुए मुख्यमंत्री मान की चिंताएं बढ़नी स्वाभाविक हैं।
Chandigarh: क्या यह चिंता की झलक है ?
जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान की चिंता उनके बयानों में भी साफ झलकती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले सभी सांसदों की निंदा की। उन्होंने कहा, “हम पार्टी छोड़ने वालों और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करने वालों, दोनों की ही कड़े से कड़े शब्दों में घोर निंदा करते हैं।”
मुख्यमंत्री मान ने कहा, “पार्टी किसी भी व्यक्ति से बड़ी होती है। जो सांसद पार्टी छोड़कर गए हैं, वे पंजाब का प्रतिनिधित्व नहीं करते। जब उन्हें भगवंत मान के खिलाफ कुछ नहीं मिला, तो उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) को तोड़ने की कोशिश की। भाजपा दूसरी पार्टियों में बाधाएं पैदा करती है।”
उन्होंने कहा, “पंजाबी दिल से सभी से प्यार करते हैं, लेकिन अगर कोई उनके साथ विश्वासघात करता है, तो वे उसे कभी नहीं भूलते। भाजपा में शामिल हुए 6-7 आप सांसद पंजाब से नहीं हैं। ये लोग पंजाबियों के गद्दार हैं। इन्हें सीटें मिलीं, इन्हें वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ी। इन्हें सड़कों पर जाकर लोगों के मुद्दों पर बोलने की जरूरत नहीं पड़ी। ये सिर्फ खुद को बचाने के लिए वहां गए थे। अब वहां भी इनके लिए जगह नहीं है क्योंकि ये भाजपा के साथ हैं।”








