CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तेजी से बढ़ती यह तकनीक गरीबों के प्रति अंतर्निहित पूर्वाग्रह (bias) दिखा रही है, जो सामाजिक न्याय के लिए चिंता का विषय है।
सामाजिक न्याय को बताया लोकतंत्र की आधारशिला
‘रिस्पेक्ट इंडिया’ द्वारा आयोजित ‘रश्मिरथी: सामाजिक न्याय का महाकाव्य’ विषय पर आयोजित आठवें दिनकर स्मृति व्याख्यान में सीजेआई ने कहा कि समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय किसी भी लोकतांत्रिक समाज की मूल नींव हैं।
CJI Surya Kant: असमानताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक
उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर के महाकाव्य रश्मिरथी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन रचनाओं में समानता और मानवीय गरिमा के आदर्शों को संविधान में शामिल किए जाने से पहले ही सशक्त रूप से व्यक्त किया गया था। सीजेआई ने चिंता जताई कि सात दशक बाद भी समाज में मौजूद असमानताएं खत्म नहीं हुई हैं और दिनकर द्वारा उठाए गए मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं।
एआई के खतरे को लेकर चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि एआई जैसे उभरते तकनीकी सिस्टम संवैधानिक मूल्यों और मानवीय संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं बनाए गए, तो वे सामाजिक बहिष्कार को और बढ़ा सकते हैं।
CJI Surya Kant: मनोज तिवारी को ‘दिनकर संस्कृति सम्मान 2026’
सीजेआई ने कहा कि साहित्य और संवैधानिक नैतिकता मिलकर समाज में समानता और सौहार्द बनाए रखने का स्थायी आधार प्रदान करते हैं। इस अवसर पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी को ‘दिनकर संस्कृति सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया।
विचार विमर्श में कई हस्तियों की भागीदारी
कार्यक्रम में न्यायपालिका, शिक्षा जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भाग लिया और सामाजिक न्याय तथा साहित्य के महत्व पर अपने विचार साझा किए। सीजेआई की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनियाभर में इसके नैतिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा तेज हो रही है।
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