Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक पल में सब कुछ बदल गया। पांच मंजिला पीजी इमारत भरभराकर गिरी तो धूल के गुबार में कई जिंदगियां दब गईं। हादसे के बाद सामने आए वीडियो इस मंजर की भयावहता बयां करते हैं, कहीं मलबे के नीचे से मदद की पुकार, तो कहीं एक महिला की कांपती आवाज में निकलता है, “ओह गॉड… कितने सारे बच्चे।” मलबे में फंसे एक छात्र ने महज कुछ सेकंड का वीडियो बनाकर मदद मांगी; चेहरे पर खून, चारों तरफ मलबा और फिर भी बचने की उम्मीद। कुछ ही देर पहले जहां छात्रों की आवाजाही और जिंदगी की चहल-पहल थी, वहां अब मलबा, सन्नाटा और अपनों को तलाशती आंखें थीं। दिल्ली का नाता मानो इन हादसों से बहुत पुराना रहा है जो लापरवाही के चलते समय समय पर सामने आते रहते है।
Satya Niketan Building Collapse: रेखा सरकार को कैसे भुलाया जाए-
इस पूरी कहानी को बिना रेखा सरकार को भूले नहीं लिखा जा सकता है साथ ही इस मौके पर एमसीडी में कुर्सी तोड़ रहे या केवल खाना पूर्ति कर रहे अधिकारियों को भी जगाना आवश्यक सा लगता है। दक्षिण दिल्ली में स्थित कटवारिया सराय, बैर सराय, लाडो सराय, मुनिरका आदि भी किसी दिन सत्या निकेतन के हादसे का स्पॉट प्वाइंट बन जाए तो चौंकिएगा मत क्योंकि ये रेखा सरकार का कालखंड है। यहां प्रशासनिक पदों पर बैठे हुक्मरानों को जगाने के लिए न कोई अलार्म सेट है ना ही कुछ और।
सत्ता में मशगूल हुई रेखा सरकार ने अपने एक साल से ज्यादा पूरे कर लिए लेकिन शायद सत्ता की मलाई का आनंद लेते। अभी मई सैदुलाजाब में हुई इमारत गिरने की घटना से 06 लोगों की मौत के ज़ख्म भरे ही नहीं थे की रेखा सरकार के कार्यकाल में अब 04 महीने बाद ही लोगों के कानों में ये दूसरी चीख सुनाई दे गई है। दिल्ली इन हादसों से कोई अछूती नहीं रही है ओल्ड राजिंदर नगर में भी आज से दो साल पहले बेसमेंट में पानी घुसने से 03 छात्रों ने अपनी जान गवाई थी।
अब सवाल उठता है कब जागेगी रेखा सरकार?
कब लापरवाही की मिलेगी सजा?
उन मासूमों को क्या दोष जो दिल्ली में पढ़ने तो आए लेकिन मलबे में हमेशा के लिए दफन हो गए?
सवाल कई है लेकिन उत्तर है सिर्फ मौन.
Satya Niketan Building Collapse: मालिक को बस किराये से मतलब, देखने तक नहीं आते-

हमारी तफ्तीश में हुए बड़े खुलासे-
दरअसल सत्य निकेतन की संकरी गलियों में बड़ी संख्या में हॉस्टल, पीजी और खाने-पीने की दुकानें हैं। गलियां तंग होने के कारण बचाव दल के उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। मलबे में फंसे कई छात्र फोन कर लोगों से मदद और जान बचाने की गुहार लगाते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही तेज कंपन महसूस हुआ। लोग घरों से बाहर निकले तो ‘हॉस्टल डेज’ पीजी की जगह मलबे का ढेर नजर आया। स्थानीय लोग अपने हाथों और जो भी औजार उपलब्ध थे, उनकी मदद से मलबा हटाने में जुट गए। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, रविवार होने के कारण कई छात्र पीजी में ही मौजूद थे।
करीब 20 साल से इलाके में रह रहीं प्रियंका ने बताया कि यहां कई पुराने मकानों को 5-6 मंजिला इमारतों में तब्दील कर लड़कों के पीजी में बदल दिया गया है। मकान मालिक खुद कहीं और रहते हैं, किराया ऑनलाइन वसूलते हैं और इमारतों की देखरेख पर ध्यान नहीं देते। जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें भी लंबे समय से रखरखाव नहीं कराया गया था।
दिल्ली हाईकोट ने दिल्ली सरकार और एमसीडी को भेजा नोटिस-
सत्य निकेतन इमारत हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए MCD और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने अधिकारियों को बचाव अभियान तेज करने और राहत कार्यों में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए, ताकि मलबे में फंसे लोगों की जान बचाई जा सके।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि करीब 50 छात्रों की जिंदगी दांव पर है और कुछ अब भी मलबे में फंसे हैं। अदालत ने सख्त सवाल करते हुए पूछा कि “ऐसे हादसों को रोकने के लिए आप क्या कर रहे हैं?” साथ ही दिल्ली सरकार से कहा, “आप अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।”
एमसीडी कमिश्नर ने स्वीकारी लापरवाही-
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर संजीव खिरवार ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि गिरी हुई इमारत से सटी दूसरी बिल्डिंग भी कमजोर हो गई है, जिसे रातभर मजबूत करने का काम किया गया। अब अगले एक-दो दिनों में उसे नियोजित तरीके से गिराने की कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नर ने बताया कि अगस्त में इसी इलाके की 3-4 इमारतों को गिराने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि जर्जर इमारतों की पहचान करने की प्रक्रिया नियमित रूप से चलती रहती है। पिछले तीन महीनों में 960 इमारतें गिराई गईं, 407 को सील किया गया, जबकि करीब 1,500 इमारतों को सील करने या गिराने के लिए नोटिस जारी किए गए। संजीव खिरवार ने कहा कि 1970 के दशक में बनी हादसे वाली इमारत को पहले कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया था और न ही उसे सील किया गया। उनके मुताबिक, इस बिल्डिंग को लेकर MCD के पास पहले से कोई शिकायत भी दर्ज नहीं थी।
इसके पहले भी कई घटनाओं के निर्दोष लोग हुए शिकार-
दिल्ली में हादसे होते रहे, जानें जाती रहीं और हर बार जांच व कार्रवाई का भरोसा दिया गया। 2010 में ललिता पार्क में इमारत गिरने से 70 लोगों की मौत हुई। 2019 के अनाज मंडी अग्निकांड में 44 जिंदगियां चली गईं। मई 2024 में विवेक विहार के बेबी केयर अस्पताल की आग ने छह नवजातों को निगल लिया। जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर में तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत हुई।
इमारतों की हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2024 में 464 और 2025 में 544 इमारत गिरने की घटनाएं दर्ज हुईं। सवाल अब भी वही है,हर हादसे के बाद जागने वाला प्रशासन, हादसा होने से पहले क्यों नहीं जागता?
खबर इंडिया करता है सावधान-
दिल्ली सरकार और प्रशासन को खबर इंडिया सावधान करता है आपको स्टूडेंट की चिंता करनी चाहिए।
कई रुपए आपने विज्ञापनों में खर्च किए, दिल्ली को स्मार्ट सिटी बनाने की पोल अब खुलने लगी है।
राजधानी में देशभर से हजारों छात्र पढ़ने और अपना भविष्य बनाने आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार और प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में जर्जर इमारतों, अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? हादसे के बाद नोटिस, जांच और कार्रवाई की बजाय हादसा होने से पहले निगरानी और रोकथाम क्यों नहीं? रेखा सरकार को अब सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई करनी होगी।
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