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350 करोड़ का जेट, 225 करोड़ का हेलिकॉप्टर और रनवे पर 400 करोड़ तक खर्च… क्या है मध्य प्रदेश सरकार का पूरा प्लान?

MP का 350 करोड़ का जेट
MP का 350 करोड़ का जेट

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 कनाडा से भारत आ रहा है। इसका इस्तेमाल मुख्यमंत्री, राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के लिए किया जाएगा। हालांकि, विमान के भारत पहुंचने के बाद वह तुरंत उड़ान भरने की स्थिति में नहीं होगा। इसके लिए कस्टम क्लियरेंस, डीजीसीए रजिस्ट्रेशन, तकनीकी जांच और कई अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। साथ ही, यह जेट प्रदेश के हर एयरपोर्ट पर भी नहीं उतर सकेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार को अपना जेट खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी वास्तविक कीमत कितनी है और इससे सरकारी खजाने को कितनी बचत हो सकती है।

Madhya Pradesh: सरकार को अपना जेट क्यों खरीदना पड़ा?

6 मई 2021 की रात मध्य प्रदेश सरकार का बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी विमान रेमडेसिविर की सप्लाई के दौरान ग्वालियर एयरबेस पर क्रैश लैंड कर गया था। जांच के बाद डीजीसीए ने कैप्टन का लाइसेंस एक साल के लिए निलंबित कर दिया था। सरकार ने यह विमान 2020 में करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसका बीमा नहीं हो सका था, इसलिए हादसे के बाद सरकार को कोई मुआवजा नहीं मिला। अब इस विमान को 7 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर बेचने के लिए बोली लगाई गई है। इस तरह सरकार को इस विमान पर 55 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। हादसे के बाद से राज्य के पास कोई चालू सरकारी विमान नहीं है। फिलहाल सरकार के पास सिर्फ एक हेलिकॉप्टर है, जिसे 2011 में खरीदा गया था और यह करीब 15 साल पुराना है।

किराये के विमान पर 290 करोड़ रुपये खर्च

मुख्यमंत्री, राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के लिए सरकार को विमान या हेलिकॉप्टर किराये पर लेना पड़ता है। विधानसभा में दिए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलिकॉप्टर के किराये पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2019 में यह सालाना खर्च सिर्फ 1.63 करोड़ रुपये था, जबकि 2025 में नवंबर तक यह रकम 90 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई। जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच ही 143 करोड़ रुपये खर्च किए गए, यानी औसतन करीब 21 लाख रुपये रोज का खर्च आया। यह खर्च ऐसे समय में हुआ जब राज्य पर करीब 5.44 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और हर साल करीब 27,000 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज में जाता है। विमानन विभाग का तर्क है कि बार-बार विमान किराये पर लेने के खर्च को कम करने के लिए अपना जेट खरीदा जा रहा है।

Madhya Pradesh: MP का 350 करोड़ का जेट
MP का 350 करोड़ का जेट
Madhya Pradesh: जेट की कीमत 233 करोड़ या 350 करोड़?

नए जेट की कीमत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसकी वजह यह है कि कुछ जगहों पर सिर्फ विमान की कीमत बताई गई है, जबकि कुछ आंकड़ों में टैक्स, परिवहन और दूसरे शुल्क भी शामिल हैं। 2022 में सरकार करीब 120 करोड़ रुपये का जेट खरीदना चाहती थी। उस समय टेक्सट्रोन ने 145 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जो बाद में बढ़कर 208 करोड़ रुपये हो गया। कीमत और डिलीवरी की समयसीमा को लेकर यह प्रक्रिया रद्द कर दी गई। मार्च 2024 में नया टेंडर निकाला गया, जिसमें बॉम्बार्डियर और एम्ब्रेयर ने बोली लगाई। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान की कीमत करीब 250 करोड़ रुपये आंकी गई थी और इसके ऊपर 30 से 35 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स और शुल्क का अनुमान था। 10 जुलाई 2024 को कैबिनेट ने बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 खरीदने को मंजूरी दी। उस समय इसकी कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई थी। अब 2026 की ताजा जानकारी के अनुसार, विमान के लिए बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान है और टैक्स, ट्रांसपोर्ट तथा अन्य खर्च जोड़ने पर पूरी डील का अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

नया हेलिकॉप्टर भी खरीदा गया

सरकार ने नए जेट के साथ एयरबस एसीएच160 हेलिकॉप्टर भी खरीदा है। इसकी कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि टैक्स और दूसरे शुल्क जोड़ने के बाद यह रकम करीब 225 करोड़ रुपये हो जाती है। यानी टैक्स और शुल्क के बाद हेलिकॉप्टर की लागत शुरुआती कीमत से करीब 1.5 गुना हो जाती है। हालांकि, विभाग ने अंतिम अनुबंध की कुल राशि और टैक्स का अलग-अलग ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। एयरबस एसीएच160 की अधिकतम रफ्तार 287 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसमें 9 लोग बैठ सकते हैं।

Madhya Pradesh: अपना जेट लेने पर कितनी बचत होगी?

अपना जेट खरीदने से किराये के विमान पर होने वाला खर्च कम हो सकता है, लेकिन वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि जेट का इस्तेमाल कितने घंटे होता है और उसके संचालन पर कितना खर्च आता है। करीब 350 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत को आधार मानें तो तीन अलग-अलग परिस्थितियों में बचत की तस्वीर अलग हो सकती है।

गुजरात जैसा इस्तेमाल हो तो

गुजरात के चैलेंजर-650 के अनुभव को आधार मानें तो सालाना संचालन खर्च करीब 10 से 11 करोड़ रुपये माना जा सकता है। इस स्थिति में किराये के विमान पर संभावित बचत करीब 60 से 70 करोड़ रुपये सालाना हो सकती है। संचालन खर्च घटाने के बाद शुद्ध बचत करीब 50 से 59 करोड़ रुपये सालाना रह सकती है। इस अनुमान के आधार पर 350 करोड़ रुपये की खरीद कीमत करीब 6 से 7 साल में निकलने की संभावना है। हालांकि, गुजरात के विमान और मध्य प्रदेश के जेट के इस्तेमाल के घंटे समान नहीं हैं, इसलिए यह केवल अनुमानित गणना है।

Madhya Pradesh: 450 घंटे सालाना उड़ान हो तो

अगर चैलेंजर-3500 का इस्तेमाल साल में करीब 450 घंटे होता है तो कुल सालाना खर्च करीब 32 करोड़ रुपये माना जा सकता है। इस स्थिति में किराये के विमान पर संभावित बचत करीब 60 से 70 करोड़ रुपये सालाना होगी। संचालन खर्च घटाने के बाद शुद्ध बचत करीब 28 से 38 करोड़ रुपये सालाना रह सकती है। इस हिसाब से 350 करोड़ रुपये की खरीद कीमत करीब 9 से 12 साल में निकलने की संभावना बनती है।

200 घंटे इस्तेमाल होने पर

अगर विमान का इस्तेमाल साल में करीब 200 घंटे ही होता है तो कुल सालाना खर्च करीब 21 करोड़ रुपये माना जा सकता है। इस स्थिति में किराये के विमान पर करीब 30 से 35 करोड़ रुपये की संभावित बचत हो सकती है। संचालन खर्च घटाने के बाद शुद्ध बचत करीब 9 से 14 करोड़ रुपये सालाना रह सकती है। ऐसे में 350 करोड़ रुपये की खरीद कीमत निकलने में 25 से 30 साल से भी ज्यादा समय लग सकता है। यानी जेट का इस्तेमाल जितना ज्यादा होगा, खरीद की कीमत उतनी जल्दी निकलने की संभावना होगी। हालांकि, ये सभी अनुमान अलग-अलग इस्तेमाल और खर्च को आधार बनाकर किए गए हैं। वास्तविक बचत ईंधन, रखरखाव, क्रू, बीमा, हैंगर और वास्तविक उड़ान घंटों पर निर्भर करेगी।

Madhya Pradesh: किराये के विमान की लागत कितनी है?

सरकार के 290 करोड़ रुपये के कुल किराये के खर्च में हेलिकॉप्टर का किराया भी शामिल है। इसलिए इस पूरी रकम को सिर्फ जेट से बचने वाली राशि नहीं माना जा सकता। 2024 में किराये के विमानों की दर करीब 4.75 लाख से 5.70 लाख रुपये प्रति घंटे थी, जबकि 2022-23 में यह दर 3.5 लाख से 4.45 लाख रुपये प्रति घंटे के बीच थी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, किराये का विमान इस्तेमाल किया जाए या नहीं, उसे स्टेट हैंगर पर खड़ा रखने के लिए करीब 10 लाख रुपये रोज का अलग खर्च देना पड़ता है।

अपना जेट चलाने में कितना खर्च आएगा?

अगर चैलेंजर-3500 साल में करीब 450 घंटे उड़ता है तो क्रू, हैंगर, बीमा और रखरखाव जैसे स्थायी खर्च करीब 8 करोड़ रुपये हो सकते हैं। कुल सालाना खर्च करीब 30 से 33 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, 200 घंटे की सालाना उड़ान पर कुल खर्च करीब 18 से 19 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। ये अनुमान अमेरिकी बाजार की लागत के आधार पर हैं। प्रति घंटे की लागत देखें तो 450 घंटे की उड़ान के हिसाब से जेट का खर्च करीब 7 लाख रुपये प्रति घंटा बैठता है, जबकि किराये के विमान की दर 4.75 लाख से 5.70 लाख रुपये प्रति घंटा है। इसलिए केवल उड़ान के प्रति घंटे खर्च के आधार पर अपना जेट सस्ता नहीं पड़ता। बचत तब ज्यादा बन सकती है जब किराये के विमान को स्टेट हैंगर में खड़ा रखने पर होने वाला करीब 10 लाख रुपये रोज का खर्च भी खत्म हो जाए।

Madhya Pradesh: गुजरात का अनुभव क्या बताता है?

गुजरात सरकार ने नवंबर 2019 में चैलेंजर-650 करीब 197.90 करोड़ रुपये में खरीदा था। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2022 तक दो साल में इसके संचालन और रखरखाव के लिए दो निजी एजेंसियों को 20.8 करोड़ रुपये दिए गए। यानी करीब 10 करोड़ रुपये सालाना खर्च हुआ। हालांकि, गुजरात के इस विमान के उड़ान घंटे सार्वजनिक नहीं हैं और यह राज्य का दूसरा विमान है, इसलिए इसकी मध्य प्रदेश के चैलेंजर-3500 से सीधी तुलना नहीं की जा सकती। फिर भी इससे सरकारी जेट के संचालन खर्च का एक अनुमान मिलता है।

चैलेंजर-3500 में क्या खास है?

बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 एक सुपर-मिड-साइज बिजनेस जेट है। इसकी अधिकतम गति करीब 882 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसकी अधिकतम रेंज 6,297 किलोमीटर बताई गई है। विमान में दो इंजन हैं और सरकारी इस्तेमाल के लिए इसे 8 यात्रियों और 2 क्रू के कॉन्फिगरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कम शोर वाला केबिन, वॉइस-कंट्रोल सुविधा, वायरलेस चार्जिंग और 4के डिस्प्ले जैसी सुविधाएं दी गई हैं। कंपनी के तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, इसकी अधिकतम यात्री क्षमता 10 है और सामान्य परिस्थितियों में इसका टेक ऑफ डिस्टेंस करीब 1,474 मीटर है।

Madhya Pradesh: कनाडा से भारत आने में तकनीकी स्टॉप जरूरी

कनाडा से भारत की दूरी करीब 11,500 से 12,000 किलोमीटर है, जबकि चैलेंजर-3500 की अधिकतम रेंज करीब 6,300 किलोमीटर है। इसलिए विमान को भारत लाते समय रास्ते में तकनीकी स्टॉप लेना होगा। इसके लिए लंदन या फ्रैंकफर्ट जैसे स्थानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत पहुंचने के बाद राज्य के विमानन विभाग की टीम विमान को रिसीव करेगी और इसके बाद कस्टम क्लियरेंस, आयात दस्तावेज और बिल ऑफ एंट्री जैसी प्रक्रियाएं पूरी होंगी।

350 करोड़ के जेट से MP को कितना फायदा?
350 करोड़ के जेट से MP को कितना फायदा?
डीजीसीए की मंजूरी के बाद ही नियमित उड़ान

भारत आने के बाद विमान को डीजीसीए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद डीजीसीए अधिकारी विमान की भौतिक और तकनीकी जांच करेंगे और उसके मेंटेनेंस से जुड़े दस्तावेज देखेंगे। जांच पूरी होने के बाद एयरवर्दीनेस प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके बाद विमानन विभाग को नियमित सरकारी उड़ानों के लिए डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट ऑपरेटर सर्टिफिकेट की जरूरत होगी। इसलिए जेट का भारत पहुंचना और उसके नियमित संचालन के लिए तैयार होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

Madhya Pradesh: सरकारी पायलटों को अभी और ट्रेनिंग

जेट उड़ाने के लिए मध्य प्रदेश के दो पायलट विश्वास राय और अरविंद सिंह को विदेश में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। दोनों पहली कोशिश में टेस्ट पास नहीं कर पाए। उनकी ट्रेनिंग 18 दिन में पूरी होनी थी, लेकिन दोबारा ट्रेनिंग के कारण इसमें तय समय से दोगुना वक्त लगा। इसका खर्च राज्य सरकार ने उठाया, हालांकि इसकी सटीक रकम सार्वजनिक नहीं की गई है। फिलहाल दोनों पायलटों को केवल को-पायलट का सर्टिफिकेट मिला है। ऐसे में बॉम्बार्डियर का एक पायलट विदेशी चालक दल की अस्थायी मंजूरी यानी एफएटीए के तहत एक साल तक जेट उड़ाएगा। स्वतंत्र रूप से उड़ान भरने से पहले दोनों सरकारी पायलटों को उसके साथ 100 घंटे जेट उड़ाना जरूरी होगा।

हर एयरपोर्ट पर नहीं उतर सकेगा विमान

चैलेंजर-3500 के संचालन के लिए रनवे की लंबाई भी महत्वपूर्ण है। विभाग के अनुसार, इस जेट के लिए कम से कम 1,800 मीटर लंबा रनवे चाहिए, जबकि बेहतर संचालन के लिए करीब 2,100 मीटर का रनवे उपयुक्त माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में 8 एयरपोर्ट और करीब 20 हवाई पट्टियां हैं। विभागीय आकलन के मुताबिक, फिलहाल यह जेट करीब 10 जगहों पर उतर सकता है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, खजुराहो, रीवा और दतिया के 7 एयरपोर्ट तथा मंदसौर, सिवनी और मंडला की 3 हवाई पट्टियां शामिल हैं।

Madhya Pradesh: 18-20 हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी

विमानन विभाग ने जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर 18 से 20 हवाई पट्टियों के विस्तार के लिए जमीन मांगी है। इनमें आमला, बिरवा यानी बालाघाट, छिंदवाड़ा, सागर, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, गुना, नीमच, पचमढ़ी, रतलाम, नागदा, शहडोल, उमरिया और दमोह शामिल हैं। विभाग के अनुमान के मुताबिक, सरकारी जमीन उपलब्ध होने पर एक हवाई पट्टी के विस्तार पर करीब 10 से 15 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। वहीं निजी जमीन का अधिग्रहण करना पड़ा तो यह लागत करीब 30 से 40 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। सभी हवाई पट्टियों के विस्तार पर कुल अनुमानित खर्च करीब 300 से 400 करोड़ रुपये बताया गया है।

जेट और एयरपोर्ट नेटवर्क पर कितना खर्च?

नए जेट, हेलिकॉप्टर और हवाई पट्टियों के विस्तार का अनुमानित खर्च जोड़ने पर कुल रकम करीब 875 से 975 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। इसमें हेलिपैड निर्माण का खर्च शामिल नहीं है। सरकार हेलिपैड नेटवर्क को भी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल प्रदेश में करीब 250 हेलिपैड हैं और अगले दो साल में 63 नए हेलिपैड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत कोशिश है कि हर 50 किलोमीटर के दायरे में एक हेलिपैड उपलब्ध हो।

Madhya Pradesh: जेट की खरीद से कितनी बचत होगी?

मध्य प्रदेश सरकार के लिए चैलेंजर-3500 खरीदना केवल 350 करोड़ रुपये का विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। इसके साथ संचालन, ईंधन, रखरखाव, क्रू, बीमा, पायलट ट्रेनिंग, डीजीसीए की मंजूरी और रनवे व हेलिपैड जैसे बुनियादी ढांचे का खर्च भी जुड़ा है। दूसरी ओर, सरकार पहले से विमान किराये पर बड़ी रकम खर्च कर रही है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, जेट का इस्तेमाल ज्यादा होने पर खरीद कीमत जल्दी निकलने की संभावना है, जबकि कम इस्तेमाल होने पर इसमें कई दशक लग सकते हैं। ऐसे में जेट से होने वाली वास्तविक बचत का पता उसके नियमित संचालन और वास्तविक खर्च सामने आने के बाद ही चलेगा।