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एआई समिट विवाद: चीनी रोबोट को विश्वविद्यालय का आविष्कार बताने वाली प्रोफेसर ने बदली प्रोफाइल, अब नई नौकरी की तलाश

Galgotias University:

Galgotias University: दिल्ली में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन से जुड़े विवाद के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने अपने व्यावसायिक परिचय मंच पर “कार्य के लिए उपलब्ध” स्थिति अपडेट कर दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय का आविष्कार बताया गया, जबकि बाद में वह विदेशी कंपनी का तैयार उत्पाद निकला।

विश्वविद्यालय ने मांगी माफी, प्रोफेसर को ठहराया जिम्मेदार

विवाद सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को पूरी जानकारी नहीं थी और कैमरे के सामने आने के उत्साह में गलत तथ्य प्रस्तुत कर दिए गए। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर को मीडिया से बातचीत करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था। सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन से बाहर कर दिया।

Galgotias University: सूचना प्रौद्योगिकी सचिव की सख्त टिप्पणी

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ऐसे आयोजनों में केवल वास्तविक कार्य ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए और गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत वस्तुओं के संबंध में आयोजक यह मानकर चलते हैं कि प्रस्तुतकर्ता सही जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रदर्शित मॉडल का पूर्व प्रमाणन संभव नहीं होता, क्योंकि इससे नवाचार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

Galgotias University:
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Galgotias University: वीडियो वायरल होने के बाद खुला मामला

वायरल वीडियो में प्रोफेसर ने रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को विश्वविद्यालय के उत्कृष्टता केंद्र द्वारा विकसित बताया था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में बड़े निवेश का दावा किया था। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं ने बताया कि यह वास्तव में चीन की एक कंपनी का तैयार मॉडल है, जो बाजार में उपलब्ध है। इसी तरह विश्वविद्यालय द्वारा प्रदर्शित एक ड्रोन को भी तैयार उत्पाद बताया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसने रोबोटिक डॉग का निर्माण नहीं किया, बल्कि छात्रों को भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

क्या है रोबोटिक डॉग तकनीक

रोबोटिक डॉग उन्नत सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली से संचालित होते हैं। इनमें विशेष मोटर आधारित कृत्रिम मांसपेशियां लगी होती हैं, जो उन्हें चलने, कूदने और कठिन रास्तों पर संतुलन बनाए रखने में सक्षम बनाती हैं। लेजर आधारित दूरी मापन तकनीक की मदद से ये अपने आसपास का त्रि-आयामी नक्शा तैयार करते हैं और मशीन शिक्षण प्रणाली के माध्यम से स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।

विश्वविद्यालय का परिचय

ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। यहां विभिन्न विषयों में डिप्लोमा से लेकर शोध स्तर तक 200 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। यह पूरा घटनाक्रम तकनीकी प्रदर्शनों में पारदर्शिता और तथ्यात्मक जानकारी की आवश्यकता पर नई बहस को जन्म दे रहा है।

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