Home » उत्तर प्रदेश » प्रयागराज में मुहर्रम जुलूस के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक, ऐतिहासिक ‘बुड्ढा ताजिया’ परंपरा के अनुसार उठेगा

प्रयागराज में मुहर्रम जुलूस के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक, ऐतिहासिक ‘बुड्ढा ताजिया’ परंपरा के अनुसार उठेगा

Prayagraj news: मुहर्रम का महीना शुरू होने से पहले प्रयागराज प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस बार मुहर्रम के जुलूसों में तलवारबाजी और किसी भी प्रकार के हथियारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीसीपी सिटी मनीष कुमार शांडिल्य ने बताया कि जुलूस के दौरान लाठी-डंडे, भाले, तलवार या किसी भी तरह के हथियार लेकर चलने की अनुमति नहीं होगी। सभी ताजियादारों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई नई परंपरा शुरू न की जाए और पुराने नियमों का ही पालन किया जाए।

मुहर्रम कमेटी की बैठक में लिए गए अहम फैसले

मुहर्रम को लेकर आयोजित बैठक में कमेटी के सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि प्रयागराज का ऐतिहासिक ‘बुड्ढा ताजिया’ इस वर्ष भी हर साल की तरह पूरे सम्मान और परंपरा के साथ निकाला जाएगा। इसके साथ ही ‘बुड्ढा ताजिया की मेहंदी’ की रस्म भी पहले की तरह निभाई जाएगी।

Prayagraj news: इस बार नहीं निकलेगा ‘बड़ा ताजिया’

मुहर्रम कमेटी ने इस साल ‘बड़ा ताजिया’ और उसके आलम को न उठाने का फैसला किया है। इसके चलते बड़ा ताजिया जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इसकी जगह इमामबाड़े में फातिहा पढ़ी जाएगी और मुहर्रम की दसवीं तारीख को परंपरा के अनुसार ‘ताजिया का फूल’ दफन किया जाएगा।

Prayagraj news: सोशल मीडिया पर भी रहेगी पुलिस की नजर

मुहर्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखेगी। अधिकारियों का कहना है कि भड़काऊ, अफवाह फैलाने वाली या माहौल खराब करने वाली पोस्ट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों खास है मुहर्रम का महीना?

Prayagraj news: मुहर्रम इस्लामी यानी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है। इस्लामिक नए साल की शुरुआत इसी महीने से होती है। हालांकि, इसे उत्सव के रूप में नहीं बल्कि शोक, इबादत और याद के तौर पर मनाया जाता है। मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे आशूरा कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिन करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने शहादत दी थी। उनकी कुर्बानी को याद करते हुए दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय मुहर्रम मनाता है।

 

 

ये भी पढ़े: एआई खा रहा है लोगों की सोचने समझने की क्षमता, जी हुजूरी का परिणाम हानिकारक