दोस्त की मदद में फंसा इंजीनियरिंग छात्र, 7 करोड़ रुपये का साइबर फ्रॉड

बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि दूसरों की मदद करनी चाहिए। लेकिन कभी-कभी, मदद करना भी खुद के लिए परेशानी बन सकता है। जब छात्र को इसका पता चला, उसने तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क किया और उत्तरी डिवीजन साइबर पुलिस स्टेशन में आयुष और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ₹100 करोड़ की साइबर ठगी, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों अनिश सिंह और मणि सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि दोनों आरोपी पहले फरीदाबाद पुलिस द्वारा इसी तरह के एक अन्य साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, हैदराबाद के 81 साल के बुजुर्ग से 7.12 करोड़ की ठगी

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड के मामले देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। ताजा मामला हैदराबाद से सामने आया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की “डिजिटल अरेस्ट”, पुलिस जांच या पार्सल में अवैध सामान की धमकी मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाएं और बिना जांच-पड़ताल किसी को पैसे न भेजें।

बेंगलुरु में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, 57 वर्षीय महिला से ₹2.05 करोड़ की ठगी

BENGLURU

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एचएएल पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाली 57 वर्षीय महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर जालसाजों ने महीनों तक डर में रखा और उससे ₹2.05 करोड़ से ज्यादा की ठगी कर ली। 19 जून से 27 नवंबर के बीच महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹2,05,16,652 रुपये ट्रांसफर किए। 27 नवंबर को उसे ठगी का एहसास हुआ, जब स्कैमर्स ने उसे NOC लेने के लिए पुलिस स्टेशन आने को कहा।

साइबर ठगी के खिलाफ CBI की बड़ी कार्रवाई, फर्जी SMS फैक्ट्री का भंडाफोड़

CBI

देश में साइबर ठगी के मामलों पर नकेल कसने के लिए CBI की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में अब CBI ने फर्जी SMS भेजने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने दूरसंचार विभाग (DoT) के नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब 21 हजार SIM कार्ड हासिल किए थे। इन सभी SIM कार्ड को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कंट्रोल किया जा रहा था, CBI की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों के चैनल पार्टनर और कर्मचारी भी अवैध तरीके से SIM कार्ड उपलब्ध कराने में शामिल हो सकते हैं। इस एंगल से भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।