‘गंगा में चिकन खाने से कोई कानून नहीं रोक सकता’: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने मुस्लिम छात्रों की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

Justice Ujjal Bhuyan:

Justice Ujjal Bhuyan: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में आयोजित जस्टिस जीपी सिंह के चौथे मेमोरियल लेक्चर में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने वाराणसी में मुस्लिम छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “गंगा में चिकन खाने से कोई कानून नहीं रोक … Read more

क्या किसी को गाली देना ‘अश्लीलता’ का अपराध है? SC ने कानून किया स्पष्ट

Supreme Court:

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294(बी) के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल गाली-गलौज, अपशब्द या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपने आप में अश्लीलता (Obscenity) का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में अश्लीलता, भद्देपन और गाली-गलौज अलग-अलग अवधारणाएं हैं।

Supreme Court: क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने-

शीर्ष अदालत ने कहा कि सिर्फ भद्दे या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग, चाहे वे कितने भी असभ्य क्यों न हों, उन्हें अश्लील नहीं माना जा सकता। अश्लीलता साबित करने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित शब्द कामुक प्रकृति के हों, वासना को भड़काने वाले हों और कमजोर मन-मस्तिष्क को नैतिक रूप से भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखते हों।

Supreme Court: गाली-गलौज और अश्लीलता में अंतर-

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा से लोगों में घृणा, नाराजगी या हैरानी पैदा हो सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि कई पुराने फैसलों में भी यह सिद्धांत अपनाया जा चुका है।

किस मामले में आया फैसला-

यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने तमिलनाडु के एक जमीन विवाद से जुड़े मामले में सुनाया। 70 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

किन धाराओं में मिली राहत-

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की IPC की धारा 294(बी) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलना) और धारा 506(2) (आपराधिक धमकी) के तहत दी गई सजा रद्द कर दी। हालांकि, IPC की धारा 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी गई।

सजा में किया गया बदलाव-

अदालत ने आरोपी की उम्र, स्वास्थ्य और घटना के जमीन विवाद से जुड़े होने को देखते हुए उसकी सजा में राहत दी। कोर्ट ने जेल की सजा को बदलकर “कोर्ट उठने तक की कैद” कर दिया और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

पीठ ने क्या किया स्पष्ट-

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल अपमानजनक या असभ्य भाषा का प्रयोग IPC की धारा 294(बी) के तहत अश्लीलता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक शब्द कामुक, वासना भड़काने वाले और नैतिक रूप से भ्रष्ट करने वाले न हों, उन्हें कानून की नजर में अश्लील नहीं माना जा सकता

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