राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम ने किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया कदम

राजा रघुवंशी केस में सोनम का सरेंडर

इंदौर के व्यापारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। पुलिस ने हत्या की साजिश में सोनम समेत अन्य आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Supreme Court: दिव्यांगों के लिए नियमों को और सशक्त बनाने पर विचार करे केंद्र, राज्यों को भी दिए सख्त निर्देश

 Supreme Court:

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं तक पहुंच को अधिक आसान और बाधारहित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को ड्राफ्ट नियमों पर विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने से पहले उन्हें और अधिक प्रभावी, त्रुटिहीन तथा लागू करने योग्य बनाया जाना चाहिए।

Supreme Court: ड्राफ्ट नियमों में सुधार के सुझावों पर करें विचार-

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि ड्राफ्ट नियमों को आधिकारिक गजट में अधिसूचित करने से पहले विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों की समीक्षा की जाए। अदालत का मानना है कि इससे दिव्यांग अधिकार अधिनियम (RPWD Act) के उद्देश्य को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

Supreme Court: राज्यों को चार सप्ताह में राज्य आयुक्त नियुक्त करने का आदेश-

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी गंभीर चिंता जताई कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार समेत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत राज्य आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हुई है। पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 79 के तहत चार सप्ताह के भीतर राज्य आयुक्तों की नियुक्ति सुनिश्चित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

केंद्र को दो आयुक्त नियुक्त करने का भी निर्देश-

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह मुख्य आयुक्त की सहायता के लिए चार सप्ताह के भीतर दो आयुक्तों की नियुक्ति करे, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।

जनवरी में होगी अगली सुनवाई-

यह मामला वर्ष 2025 में राजीव रतूरी द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले वर्ष जनवरी में तय की है

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‘सिर्फ प्रदर्शन होने पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता’, नीट पेपर लीक सुनवाई में पुलिस कार्रवाई पर SC

प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट बनाएगा गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हुए प्रदर्शनों पर एक समान गाइडलाइन बनाने की बात कही है। कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध को संवैधानिक अधिकार बताया और कहा कि बिना वजह लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

मेघालय हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द की, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

सोनम रघुवंशी की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने उन्हें तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया। सुनवाई में मेघालय सरकार और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे, जिस पर कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं।

क्या किसी को गाली देना ‘अश्लीलता’ का अपराध है? SC ने कानून किया स्पष्ट

Supreme Court:

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294(बी) के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल गाली-गलौज, अपशब्द या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपने आप में अश्लीलता (Obscenity) का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में अश्लीलता, भद्देपन और गाली-गलौज अलग-अलग अवधारणाएं हैं।

Supreme Court: क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने-

शीर्ष अदालत ने कहा कि सिर्फ भद्दे या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग, चाहे वे कितने भी असभ्य क्यों न हों, उन्हें अश्लील नहीं माना जा सकता। अश्लीलता साबित करने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित शब्द कामुक प्रकृति के हों, वासना को भड़काने वाले हों और कमजोर मन-मस्तिष्क को नैतिक रूप से भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखते हों।

Supreme Court: गाली-गलौज और अश्लीलता में अंतर-

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा से लोगों में घृणा, नाराजगी या हैरानी पैदा हो सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसे अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि कई पुराने फैसलों में भी यह सिद्धांत अपनाया जा चुका है।

किस मामले में आया फैसला-

यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने तमिलनाडु के एक जमीन विवाद से जुड़े मामले में सुनाया। 70 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

किन धाराओं में मिली राहत-

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की IPC की धारा 294(बी) (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द बोलना) और धारा 506(2) (आपराधिक धमकी) के तहत दी गई सजा रद्द कर दी। हालांकि, IPC की धारा 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी गई।

सजा में किया गया बदलाव-

अदालत ने आरोपी की उम्र, स्वास्थ्य और घटना के जमीन विवाद से जुड़े होने को देखते हुए उसकी सजा में राहत दी। कोर्ट ने जेल की सजा को बदलकर “कोर्ट उठने तक की कैद” कर दिया और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

पीठ ने क्या किया स्पष्ट-

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल अपमानजनक या असभ्य भाषा का प्रयोग IPC की धारा 294(बी) के तहत अश्लीलता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक शब्द कामुक, वासना भड़काने वाले और नैतिक रूप से भ्रष्ट करने वाले न हों, उन्हें कानून की नजर में अश्लील नहीं माना जा सकता

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