कौन हैं एंडी बर्नहम? साधारण परिवार से निकलकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम का नाम नए प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे तेजी से उभरकर सामने आया है। मई में हुए स्थानीय काउंसिल चुनावों में लेबर पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कीर स्टारमर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे थे। पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा था और नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई थी।

ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर का इस्तीफा: 100 से ज्यादा सांसदों का विरोध बना वजह, 7 साल में 5वें PM ने छोड़ा पद

कीर स्टार्मर का इस्तीफा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। लेबर पार्टी में नेतृत्व संकट गहराने के बाद नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी। एंडी बर्नहैम समेत कई नेता रेस में हैं और जुलाई में नया प्रधानमंत्री चुना जाएगा। देश में राजनीतिक बदलाव जारी

क्या ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर देने वाले हैं इस्तीफा? UK की राजनीति में बढ़ीं हलचलें

ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को लेकर ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने और पद छोड़ने की समय-सीमा का ऐलान कर सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें सोमवार पर टिकी हुई हैं। अगर कीर स्टार्मर की ओर से कोई बड़ा ऐलान होता है तो यह ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय पर बड़ा साइबर अटैक, चीन से जुड़े हैकर्स पर शक

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय (FCDO) पर हुए एक बड़े साइबर हमले ने देश की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यूके मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले के पीछे संदिग्ध तौर पर चीनी हैकर्स का हाथ माना जा रहा है। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, स्टॉर्म-1849 को बीजिंग से जुड़े राज्य-समर्थित हैकिंग नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है। पश्चिमी एजेंसियों का दावा है कि यह ग्रुप उन नेताओं, संसदीय कर्मचारियों और संगठनों को निशाना बनाता है।

ब्रिटिश भारतीय वोटरों का रुझान बदला, पारंपरिक पार्टियों से दूरी बढ़ी

BRITISH voters

इस हफ्ते जारी हुई “ब्रिटिश भारत जनगणना 2025” की रिपोर्ट ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश भारतीय मतदाता अब लेबर और कंजरवेटिव जैसी पारंपरिक पार्टियों के स्थायी समर्थक नहीं रहे। लंदन स्थित थिंक टैंक 1928 Institute द्वारा जारी अध्ययन में पाया गया कि भारतीय मूल के मतदाताओं में सुधार समर्थक रुझान पिछले साल की तुलना में तीन गुना बढ़कर 13% तक पहुंच गया है।