Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने विधान भवन में ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद सियासी पारा चढ़ गया है। अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले आजमी ने इस बार राज्य में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मुसलमानों के लिए सड़क पर चलना मुश्किल
विधान भवन में बोलते हुए अबू आजमी ने कहा कि वर्तमान माहौल में मुसलमान खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ऐसा माहौल बन चुका है कि कौन कब हमला कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। दाढ़ी, कुर्ता-टोपी पहनकर निकलने वाले को कब कौन मार दे, यह भी निश्चित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई हिस्सों में इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। अबू आजमी ने अपने बयान में हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये बढ़ती नफरत की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने पुणे में इफ्तार के दौरान हमले, अकोला में एक 17 वर्षीय युवक की हत्या और नांदेड़ में ईद के दिन हुए संदिग्ध मोटरसाइकिल विस्फोट जैसी घटनाओं का उल्लेख किया। उनका कहना है कि ये घटनाएं समाज में बढ़ती असहिष्णुता और तनाव को दर्शाती हैं।
आज मुसलमानों के लिए सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। दाढ़ी, कुर्ता-टोपी पहनकर निकलने वाले को कब कौन मार दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। सत्ता के लिए नफरत बढ़ाने का नतीजा आज महाराष्ट्र भुगत रहा है।
पुणे में इफ्तार कर रहे लोगों पर धारदार हथियारों से हमला, अकोला में सिर्फ देखने पर 17… pic.twitter.com/omS9KBubGa
— Abu Asim Azmi (@abuasimazmi) March 23, 2026
सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग
सपा नेता ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि हेट क्राइम के खिलाफ कड़े और त्वरित कदम उठाए जाएं, ताकि सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि इससे पहले भी अबू आजमी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आए थे, जिसमें उन्होंने फिल्म धुरंधर 2 पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि इस फिल्म के जरिए मुसलमानों की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐतिहासिक घटनाएं और दंगे हुए हैं, जिन पर फिल्म बनाई जा सकती थी, लेकिन इस तरह की फिल्मों के जरिए एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना ठीक नहीं है।
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