Jyesth Panchami: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 7 मई (गुरुवार) को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी। यह तिथि सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव माना जाएगा। सनातन परंपरा में यह दिन विशेष माना जाता है क्योंकि इस दिन अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का शुभ संयोग बन रहा है, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजे होगा। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। हालांकि उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव रहेगा। इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। योग साध्य रहेगा और करण तैतिल रहेगा।
शुभ योग और इसका महत्व
इस दिन अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। यह समय नए कार्य शुरू करने, यात्रा करने, महत्वपूर्ण निर्णय लेने और पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग सफलता और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना गया है।

Jyesth Panchami: पंचमी तिथि के शुभ मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 59 मिनट से 7 बजकर 20 मिनट तक, अमृत काल दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक और निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय और सावधानी
गुरुवार को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। यमगण्ड काल सुबह 5 बजकर 36 मिनट से 7 बजकर 16 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 8 बजकर 57 मिनट से 10 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 4 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा और विडाल योग शाम 6 बजकर 46 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 35 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषीय सलाह
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार राहुकाल और अन्य अशुभ समय में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। ऐसा करने से बाधाओं और असफलताओं की संभावना कम हो जाती है और कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है।
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